तेल अवीव। अमेरिका और ईरान (US and Iran) के बीच संभावित संवाद में पाकिस्तान की कथित मध्यस्थ भूमिका को लेकर इजरायल ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत में इजरायल के राजदूत (Reuven Azar) ने पाकिस्तान को “अविश्वसनीय” (Incredible) बताते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में मध्यस्थ वही देश बन सकता है, जिस पर सभी पक्ष भरोसा कर सकें।
राजदूत अजार ने कहा कि पाकिस्तान भरोसे के लिहाज से उपयुक्त पक्ष नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, किसी भी मध्यस्थ देश के लिए निष्पक्षता और विश्वसनीयता जरूरी होती है, जबकि पाकिस्तान को लेकर लंबे समय से सुरक्षा और कट्टरपंथ से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के पास ऐसी जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया को संभालने की क्षमता सीमित है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान की ओर से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भूमिका निभाने के दावे किए जा रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा था कि इस मुद्दे पर भारत की ओर से किसी तरह की आपत्ति सामने नहीं आई है। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच हुई चर्चाओं में मुख्य फोकस आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रहा।
राजदूत अजार ने Benjamin Netanyahu और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच मतभेद की खबरों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के रिश्तों में किसी तरह की गंभीर दरार नहीं है और जिन लोगों को ऐसी उम्मीद है, उन्हें अभी और इंतजार करना होगा।
उन्होंने लेबनान से जुड़े सैन्य मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच सामने आए मतभेदों को “रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण असहमति” करार दिया। अजार के मुताबिक, अलग-अलग नेतृत्व शैली और निर्णय लेने के तरीकों के कारण मतभेद की धारणा बन सकती है, लेकिन इसे किसी बड़े राजनीतिक टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राजदूत ने यह भी कहा कि कई बार राजनीतिक कारणों से नेताओं के संबंधों को वास्तविकता से ज्यादा तनावपूर्ण दिखाया जाता है, जबकि रणनीतिक स्तर पर सहयोग जारी रहता है।
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