
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान (United States and Iran) युद्ध खत्म करने के लिए लंबी बातचीत के बाद एक फ्रेमवर्क समझौते पर पहुंच गए हैं, इसको 19 जून को जिनेवा में पाकिस्तान (Pakistan) की मध्यस्थता में साइन किया जाएगा. फ्रेमवर्क पर सहमति बनने के बाद से ही खाड़ी देशों के साथ-साथ पूरी दुनिया के नेता दोनों देशों को बधाई दे रहे हैं और भविष्य में शांति की उम्मीद कर रहे हैं. लेकिन, इस जंग का केंद्र और वजह रहने वाले देश इजराइल के पीएम का इस पर कोई बयान अभी तक नहीं आया है.
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को एक्स पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में एक मैसेज पोस्ट किया. इसका ईरान के साथ बन रहे सीजफायर समझौते या लेबनान में चल रहे संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं था. उन्होंने रविवार को सिर्फ ट्रंप के लिए उनके 80वें जन्मदिन पर बधाई देने वाला मैसेज लिखा.
नेतन्याहू ने समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है. वहीं उनकी सरकार के अन्य लोगों ने समझौते कि यह कहकर आलोचना की है कि यह इजराइल और पूरी आजाद दुनिया के लिए बुरा है और इससे हमारी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती है.
फ्रेमवर्क के बाद अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों को बाहर करने का आदेश
पिछले महीने इजराइल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने चेतावनी दी थी कि बेन-गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अमेरिकी रीफ्यूलिंग विमानों की लगातार मौजूदगी के कारण 24 लाख से ज्यादा फ्लाइट टिकट रद्द हो सकते हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर मिरी रेगेव ने रविवार को तब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इन विमानों को हटाने के लिए कहा, जब फ्रेमवर्क पर पहुंचने की खबरे आनी शुरू हुई.
हम इस डील में शामिल नहीं- इतामार बेन ग्विर
इजराइली नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर ने सबसे पहले इस पर टिप्पणी की और अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा, “ट्रंप का समझौता हमें बाध्य नहीं करता… हम इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं. यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता. हमें हिजबुल्लाह के खात्मे से कम किसी भी चीज पर समझौता नहीं करना चाहिए. हमें उस जमीन के एक इंच हिस्से से भी पीछे नहीं हटना चाहिए जिस पर हमारे सैनिकों ने कब्जा किया है और जिसे आतंकवादी बुनियादी ढांचे से मुक्त कराया है.”
नेतन्याहू के इन दो मंत्रियों के बयानों से लग रहा है कि ट्रंप के फैसले के आगे इजराइल बगावत पर उतर गया है. अगर इजराइल लेबनान पर हमले नहीं रोकता है और अपनी सेना वापस नहीं बुलाता है, फिर इस जंगबंधी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. क्योंकि ईरान ने साफ किया है कि वह हिजबुल्लाह को अकेला नहीं छोड़ेंगा.
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