
मुंबई । मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस(Chief Minister Devendra Fadanvis) ने कहा कि दोनों ठाकरे भाइयों के लिए (For both Thackeray Brothers) अपनी पार्टियों की जमीन बचाना (To save their Party Ground) मुश्किल हो गया है (It has become Difficult) ।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे हिंदुत्व छोड़ चुके हैं और वे वही कर रहे हैं, जिसका बालासाहेब ने जिंदगी भर विरोध किया था । सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 25 साल तक मुंबई में सत्ता में रहने के बाद उनके पास गिनाने के लिए कोई काम नहीं है। मैंने उनका एक काम गिनाने के लिए एक हजार रुपए का इनाम रखा था, लेकिन कोई नहीं आया। मैंने राशि सात हजार तक बढ़ा दी, लेकिन उनका काम गिनाने वाला कोई नहीं मिला। उन्होंने राज-उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों भाइयों के लिए पार्टियों की जमीन बचाना मुश्किल हो गया है। ये दोनों पार्टियां जमीन खो रही हैं। जमीन को तलाशने के लिए उन्हें लगा कि साथ आना जरूरी है। उन्हें लगता था कि दोनों साथ में आएंगे तो पूरा मराठी वोट उन्हें ही मिलेगा। उन्हें यह पता ही नहीं था कि मराठी वोटर संकुचित भावना वाला नहीं होता है। वह व्यापक विचार करने वाला होता है।
उन्होंने कहा कि दो चुनाव हमने उनके खिलाफ लड़े और मुंबई में सबसे बड़ी पार्टी हम रहे। मराठी वोटरों ने हमें समर्थन दिया, हमारा स्थिर वोट है, लेकिन उन दोनों का मानना था कि साथ में आने से उनकी खोई हुई जमीन वापस उन्हें मिल जाएगी, लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है। वे बार-बार कहते हैं कि मराठीजनों के अस्तित्व की लड़ाई है। मैं कहता हूं कि मराठीजनों के अस्तित्व को कुछ नहीं हो सकता है। यह दोनों भाइयों के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने राज ठाकरे को लेकर कहा कि वह सबसे बड़े ‘लूजर’ बनने वाले हैं। गठबंधन में राज ठाकरे का फायदा उद्धव ठाकरे को मिलेगा, लेकिन उद्धव का फायदा राज ठाकरे को नहीं मिलने वाला है।
महाराष्ट्र के सीएम ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उद्धव की रैली में पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते हैं। बॉम्बे बम विस्फोट के आरोपी शामिल होकर वोट मांगते हैं। छत्रपति संभाजीनगर में रशीद मामू को वो टिकट देते हैं। अब उनके लोग मस्जिदों में जाकर कह रहे हैं कि उद्धव ठाकरे जीतकर आते हैं तो मस्जिदों के लाउडस्पीकर को फिर लगवा देंगे। ये सारी बातें क्या इशारा करती हैं? उन्होंने कहा कि हम हिंदुत्ववादी हैं, लेकिन हमारा हिंदुत्व संकुचित नहीं है। हमने हमेशा कहा है कि जो भारत की संस्कृति को अपनी संस्कृति मानता है और जो प्राचीन भारत की परंपरा को मानता है, चाहे उसकी पूजा पद्धति कोई भी हो, हम उसे हिंदू मानते हैं, लेकिन जिस तरह से उद्धव ठाकरे ने मुस्लिम तुष्टिकरण शुरू किया है, ये हमें मंजूर नहीं है। बाला साहेब ठाकरे ने जिसकी सबसे अधिक खिलाफत की, अब वे वही करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए मुझे लगता है कि उन्होंने हिंदुत्व छोड़ दिया है।
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