
नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) में सुख, समृद्धि, ज्ञान और भाग्य के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति (Devaguru Brihaspati) 19 अगस्त यानी आज पुष्य नक्षत्र से निकलकर बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र (Ashlesha Nakshatra) में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में अश्लेषा नक्षत्र को संवेदनशील और तीखे बदलावों वाला माना जाता है। गुरु का बुध के नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए वित्तीय मामलों में सावधानी बरतने का संकेत माना जा रहा है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु ज्ञान और विस्तार के कारक हैं, जबकि बुध बुद्धि और व्यापार से जुड़े ग्रह हैं। गुरु के बुध के नक्षत्र में आने से निर्णय लेने में भ्रम, जल्दबाजी और आर्थिक मामलों में गलतियां होने की आशंका बढ़ सकती है। इसका असर खास तौर पर मिथुन, धनु और मीन राशि के जातकों पर पड़ने की बात कही गई है।
मिथुन राशि: गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन मिथुन राशि के द्वितीय भाव को प्रभावित कर सकता है, जो धन और वाणी से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान बातचीत में सावधानी बरतें, क्योंकि आपकी बात का गलत अर्थ निकाला जा सकता है। लेन-देन में आंख मूंदकर किसी पर भरोसा न करें। धन हानि और बजट बिगड़ने की आशंका है।
धनु राशि: धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश आपके अष्टम भाव को प्रभावित कर सकता है। बनते कामों में अचानक रुकावट आ सकती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान शेयर बाजार या जोखिम वाले निवेश से दूरी रखना बेहतर होगा। खान-पान और पेट से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
मीन राशि: मीन राशि के स्वामी भी गुरु हैं। अश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव पंचम भाव और बौद्धिक क्षमता पर पड़ सकता है। विद्यार्थियों और कारोबारियों को एकाग्रता की कमी महसूस हो सकती है। बड़े फैसले भावनाओं में आकर लेने से बचें। अनचाहे खर्चों के कारण परिवार का बजट प्रभावित हो सकता है।
ज्योतिषीय उपाय: मान्यता के अनुसार गुरु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। चने की दाल, हल्दी या पीले वस्त्रों का दान करना भी शुभ माना जाता है। गुरुवार को गाय को चने की दाल और गुड़ मिलाकर रोटी खिलाने की भी सलाह दी जाती है।
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