
नई दिल्ली. ईरान (Iran) के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) ने अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब अहंकारी शासक सत्ता के शिखर पर पहुंचते हैं, तभी उनका पतन शुरू हो जाता है.
खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलना उन शासकों से की है, जिन्हें उन्होंने अत्याचार और घमंड का प्रतीक बताया है. उन्होंने कहा कि जो अमेरिकी राष्ट्रपति पूरे विश्व के बारे में घमंड से फैसले सुनाता है, उसे यह जान लेना चाहिए कि मोहम्मद रजा पहलवी जैसे अत्याचारी और अहंकारी शासकों ने भी अपने घमंड की चरम सीमा पर पहुंचकर ही अपना पतन देखा था. उसका भी यही हश्र होगा.
खामेनेई की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ईरान में व्यापक अशांति फैल रही है और अमेरिका के साथ तनाव चरम पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में दिए गए बयानों के बाद हालात और भड़क गए हैं.
खामेनेई ने तेहरान में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए वॉशिंगटन पर खुली पाखंड नीति का आरोप लगाया. उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति का हवाला देते हुए कहा कि आप देख सकते हैं कि उन्होंने लैटिन अमेरिका के एक देश को कैसे घेर रखा है और वहां क्या-क्या कर रहे हैं. उन्हें जरा भी शर्म नहीं आती और वे खुलेआम कहते हैं कि यह सब तेल के लिए है. तेल के लिए.
ईरान के सर्वोच्च नेता ने तेहरान और अन्य शहरों में रातोरात हुई तोड़फोड़ की भी कड़ी निंदा की और इसके लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने और उनकी वाहवाही पाने के लिए अपने ही देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं. विनाश पर उतारू कुछ लोग आए और अपने ही देश की इमारतों को तोड़ डाला ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति प्रसन्न हो जाएं. अगर वह इतना ही काबिल है, तो पहले अपने देश को संभाले.
उन्होंने ईरान की सैन्य शक्ति को लेकर भी चुनौतीपूर्ण लहजा अपनाते हुए कहा कि आज ईरानी राष्ट्र क्रांति से पहले की तुलना में कहीं अधिक सुसज्जित और सशस्त्र है. हमारी आध्यात्मिक शक्ति और पारंपरिक हथियारों की तुलना अतीत से नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि ईरान को लेकर अमेरिकी आकलन पहले की तरह आज भी गलत हैं.
इस उथल-पुथल के बीच ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी भी फिर चर्चा में आ गए हैं. 1979 की इस्लामी क्रांति में सत्ता से बेदखल हुए शाह के बेटे रजा पहलवी ने ईरानियों से सड़कों पर उतरने की अपील की है और हालिया प्रदर्शनों में पूर्व राजशाही के समर्थन में नारे भी सुनाई दिए हैं.
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