
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन (Congress MP Ranjit Ranjan) ने कहा कि स्कूलों में छात्राओं के लिए टॉयलेट कमी (Lack of Toilets for Girl Students in Schools) बेहद गंभीर और शर्मनाक समस्या है (Is very Serious and Shameful Problem) । उन्होंने इस समस्या से जुड़ा विषय राज्यसभा में उठाया ।
कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन ने बताया कि देश के हजारों स्कूलों में छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की आज भी भारी कमी है। यह सिर्फ सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारी बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान का सवाल है। उन्होंने कहा कि सरकारी मंचों से बेटियों की बात होती है, उनके भविष्य की बात की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई स्कूलों में आज भी बेटियों के लिए एक शौचालय तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आई एक जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में 5,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। इस स्थिति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी शर्मनाक बताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
रंजीता रंजन ने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक राज्य की नहीं है। हमारे देश में स्वच्छता सुविधाओं और मासिक धर्म प्रबंधन की कमी के कारण हर साल लगभग 2.3 करोड़ लड़कियां स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। कई स्कूलों में न तो साफ पानी है, न साबुन है और न ही सेनेटरी नैपकिन के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था है। ऐसी परिस्थितियों में लड़कियों के लिए पढ़ाई जारी रखना बेहद कठिन हो जाता है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि कुछ अन्य राज्यों की स्थिति और भी चिंताजनक है। बिहार में केवल 23 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय हैं। उत्तर प्रदेश में यह संख्या काफी कम है। वर्ष 2024-25 के सर्वेक्षण के अनुसार देश में लगभग 14.72 लाख स्कूल हैं, लेकिन बड़ी संख्या में विद्यालयों में छात्राओं के लिए पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उदाहरण के लिए जम्मू कश्मीर में 1,321 सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं हैं। उत्तराखंड में 148 विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं। राजस्थान में हजारों से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। मध्य प्रदेश में भी बहुत बड़ी संख्या में स्कूलों में शौचालय नहीं हैं। इसके अतिरिक्त यूनिसेफ के अनुसार भारत में लगभग 22 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए उपयुक्त शौचालय उपलब्ध नहीं हैं।
रंजीत रंजन ने कहा कि यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या हम सिर्फ नारों से बेटियों को सशक्त बना रहे हैं। क्या बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ केवल भाषणों और विज्ञापनों तक ही सीमित है? उन्होंने कहा, “मैं सरकार से आग्रह करती हूं कि देश भर के स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं का तत्काल राष्ट्रीय सर्वेक्षण कराया जाए। हर स्कूल में छात्राओं के लिए अलग, सुरक्षित और कार्यशील शौचालय सुनिश्चित किए जाएं। साफ पानी, साबुन और मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। अगर हमें सच में अपनी बेटियों को सशक्त बनाना है, तो हमें नारों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे।”
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved