img-fluid

लॉ यूनिवर्सिटी भर्ती घोटाले की जांच शुरू, सीधे एक्शन की तैयारी

April 03, 2026

  • अग्निबाण ने प्रमुखता से उठाया था मामला, चयन प्रक्रिया में साक्षात्कार के नाम पर अपनों को उपकृत करने का मामला, प्रभारी कुलसचिव को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी

जबलपुर। धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में संविदा भर्ती और आउटसोर्सिंग प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार की जांच के आदेश जारी किए गए हैं। कुलपति के निर्देश पर वर्तमान कुलसचिव ने इस मामले की फाइलें खोल दी हैं। यह कार्रवाई वर्ष 2021 में हुई नियुक्तियों और 7 वर्षों से चल रहे आउटसोर्स अनुबंधों में पाई गई विसंगतियों के आधार पर की जा रही है। लॉ यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में है। वर्ष 2021 में की गई संविदा नियुक्तियों को लेकर गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसके बाद कुलपति ने कुलसचिव को गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन अब इन नियुक्तियों से संबंधित सभी दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण कर रहा है।

विज्ञापन की शर्तों और पात्रता में विसंगति
विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2021 में पर्सनल असिस्टेंट के पद के लिए जो विज्ञापन जारी किया गया था, उसमें पात्रता संबंधी नियमों का अभाव पाया गया है। विज्ञापन में न तो अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता का स्पष्ट उल्लेख था और न ही आयु सीमा निर्धारित की गई थी। आरोप है कि यह जानबूझकर किया गया ताकि किसी विशेष व्यक्ति का चयन आसानी से हो सके। इस पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान विवि के तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव जलज गोटिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

वेतनमान निर्धारण में धांधली
नियुक्ति के दौरान अपनाई गई पद्धति पूरी तरह संदेह के घेरे में है। भर्ती के लिए केवल साक्षात्कार का आयोजन किया गया, जबकि इस स्तर के पदों के लिए लिखित परीक्षा और अन्य कौशल परीक्षण अनिवार्य होते हैं। इसके साथ ही चयनित व्यक्ति के लिए जो पे-ग्रेड निर्धारित किया गया, वह विश्वविद्यालय के मानकों से कहीं अधिक था। शिकायतकर्ता का दावा है कि पद पर उसी व्यक्ति को बिठाया गया जो पहले से आउटसोर्स के माध्यम से वहां कार्यरत था।

आउटसोर्स अनुबंधों में नियमों की अनदेखी
संविदा भर्ती के साथ-साथ आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही नियुक्तियों में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नियमों के अनुसार किसी भी बाहरी एजेंसी का अनुबंध अधिकतम 3 वर्ष की अवधि तक ही मान्य हो सकता है। इसके विपरीत इस विश्वविद्यालय में एक ही एजेंसी पिछले 7 वर्षों से निरंतर कार्य कर रही है। अनुबंध का नवीनीकरण न करना और नई निविदाएं आमंत्रित न करना प्रशासनिक शिथिलता या मिलीभगत की ओर इशारा करता है। आउटसोर्स कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन में भी भारी अंतर देखा गया है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन के विपरीत, विश्वविद्यालय में कार्यरत कुछ खास लिपिकों को दोगुनी राशि का भुगतान किया जा रहा है। सरकारी धन के इस दुरुपयोग को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन पूर्व में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब वर्तमान प्रशासन इन भुगतानों के आधार और उनकी वैधता की पड़ताल कर रहा है।

दोषियों पर सीधी कार्रवाई करेंगे
विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव डॉ. प्रवीण त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि कुलपति के आदेशानुसार जांच की प्रक्रिया गतिमान है। चूंकि यह मामला उनके कार्यभार ग्रहण करने से पहले का है, इसलिए वे रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट कुलपति के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि संस्थान की गरिमा बनी रहे।

Share:

  • उज्जैन में भीख माँगते मासूम.. कोई रोकने को तैयार नहीं, प्रशासन मौन

    Fri Apr 3 , 2026
    उज्जैन। जिला प्रशासन की ओर से शहर को बाल भिक्षामुक्त करने का अभियान सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गया है। आलम यह है कि आज भी शहर के समस्त चौराहों व मंदिरों पर खुलेआम बच्चे भीख माँगते देखे जा सकते है। उल्लेखनीय हैं कि पूर्व में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved