
10 करोड़ के चक्कर में अटकी इंदौर की 8 शराब दुकानें, व्यापारियों ने 76 करोड़ का ऑफर 31 मार्च को ही दे दिया
इंदौर। मध्य प्रदेश (MP) में चल रही शराब दुकानों (Liquor Shop) की नीलामी ( Auctions) का कल 14वां चरण आयोजित किया गया। इसमें अब तक बिक ना पाई प्रदेश की 420 से ज्यादा दुकानों के लिए टेंडर बुलाए गए थे, जिनमें इंदौर (Indore) की भी 8 दुकानें (8 shops) शामिल थीं। लेकिन सिर्फ 21 दुकानों के लिए टेंडर आए। शेष बची 400 से ज्यादा दुकानों की आज फिर नीलामी की जाएगी।
प्रदेश की 3553 दुकानों के लिए सरकार ने पिछले साल की अपेक्षा इस बार 20 प्रतिशत कीमत बढ़ाई थी, लेकिन कई दुकानों के लिए बढ़ी हुई कीमत पर टेंडर ना मिलने के कारण सरकार ने कीमत को अब 30 प्रतिशत तक कम कर दिया है। इसके बाद भी अब भी 400 से ज्यादा दुकानें बिक नहीं पाई है। इसमें इंदौर की 173 में से आठ दुकान में भी शामिल है। इन 8 दुकानों के लिए 31 मार्च को जब सरकार ने न्यूनतम बोली की सीमा खत्म कर दी थी, तब 76 करोड़ के ऑफर मिले थे, जो तय कीमत से करीब 37 प्रतिशत कम थे लेकिन कई जिलों में यह ऑफर बहुत ज्यादा कम होने के कारण सरकार ने दोबारा नीलामी प्रक्रिया शुरू की और न्यूनतम बोली की सीमा 30 प्रतिशत तक कम पर निर्धारित की। इंदौर की बची दुकानों की तय कीमत 123 करोड़ है, जो 30त्न कम हो जाने के बाद 86 करोड़ होती है। यानी सरकार के पास 76 करोड़ का ऑफर है लेकिन सरकार 86 करोड़ चाहती है और यह सभी दुकानें सिर्फ 10 करोड़ के चक्कर में अटकी हुई है। विभाग द्वारा आज दोबारा इन सभी दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया 15वें चरण में आयोजित की गई है। शाम 5 बजे टेंडर खुलेंगे। उम्मीद है कि आज प्रदेश की कई और दुकानें बिकेगी। दूसरी और सरकार दुकानें ना बिकने की स्थिति में खुद निगम मंडल बनाकर इन्हें संचालित करने पर भी विचार कर रही है।
8 दुकानें बचने के बाद भी इंदौर लक्ष्य से आगे निकला
सरकार द्वारा इंदौर की 173 दुकानों को 20 प्रतिशत कीमत बढ़ाए जाने के बाद 2102 करोड़ रुपए में नीलाम करने का लक्ष्य दिया गया था। यानी इंदौर को 2102 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करना था। अभी इंदौर की 8 दुकानें बिकना बाकी है, लेकिन खास बात यह है कि 173 में से 165 दुकानें ही 2105 करोड़ में बिक चुकी है। यानी 8 दुकानें बिके बिना ही इंदौर लक्ष्य से 3 करोड़ आगे निकल चुका है। अब बची दुकानें जिस भी कीमत में बिकती हैं वो इंदौर के खाते में अतिरिक्त आय के रूप में ही जुड़ेगा।