
नई दिल्ली। श्याम बेनेगल (Shyam Benegal) हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) के ऐसे निर्देशक रहे जिन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज (Society), संस्कृति और मानवीय भावनाओं (Human Emotions) को गहराई से पेश किया। भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। आइए जानते हैं उनके निर्देशन (Direction) में बनी 10 आइकॉनिक फिल्मों के बारे में।
1. अंकुर (1974)
श्याम बेनेगल की यह पहली फिल्म सामाजिक मुद्दों पर आधारित थी। फिल्म में शबाना आजमी की भी पहली भूमिका थी। ‘अंकुर’ ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 40 से अधिक अवॉर्ड जीते और श्याम बेनेगल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
2. मंडी (1983)
इस फिल्म में शबाना आजमी, स्मिता पाटिल और नसीरुद्दीन शाह मुख्य भूमिका में थे। ‘मंडी’ समाज की उन महिलाओं की कहानी बताती है जो गुजारा करने के लिए वेश्यालय से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होती हैं। फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया।
3. कलयुग (1981)
यह महाभारत से प्रेरित फिल्म थी, जिसमें कलयुगी परिवार में कारोबार और सत्ता को लेकर होने वाली दुश्मनी दिखाई गई। फिल्म में राज बब्बर, शशि कपूर, सुप्रिया पाठक, अनंत नाग, रेखा, कुलभूषण खरबंदा और सुषमा सेठ जैसे कलाकार शामिल थे।
4. जुबैदा (2000s)
‘जुबैदा’ में एक अलग प्रेम कहानी दिखाई गई। रेखा, करिश्मा कपूर और मनोज बाजपेयी ने लीड रोल निभाया।
5. भूमिका (1990)
इस फिल्म में अमोल पालेकर, स्मिता पाटिल, अनंत नाग, अमरीश पुरी और नसीरुद्दीन शाह मुख्य भूमिका में थे। कहानी एक फेमस मराठी अभिनेत्री की जिंदगी में पुरुषों के आने और उसके जीवन में बदलाव पर केंद्रित थी।
6. निशांत (1975)
‘निशांत’ में गांव के उच्च वर्ग द्वारा आम लोगों का शोषण दिखाया गया। इसमें शबाना आजमी, गिरीश कर्नाड, नसीरुद्दीन शाह, अनंत नाग, अमरीश पुरी और स्मिता पाटिल मुख्य भूमिका में थे। फिल्म को शिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन प्लेक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
7. जुनून
यह फिल्म शाही परिवार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित थी। इसमें शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और शशि कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई।
8. मुजीब: एक राष्ट्र का निर्माण (2023)
यह बायोपिक शेख मुजीबुर्रहमान की जिंदगी पर आधारित थी। अर्जुन चक्रवर्ती ने शेख मुजीब की भूमिका निभाई।
श्याम बेनेगल की इन फिल्मों ने न केवल हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी बल्कि समाज और मानवीय संवेदनाओं को पर्दे पर जीवंत किया। उनकी फिल्मों की कहानियां आज भी दर्शकों को सोचने और महसूस करने पर मजबूर करती हैं।
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