
उज्जैन। अभी भी लड़के और लड़कियों में आम नागरिक अंतर समझ रहे हैं और पहली ख्वाहिश लड़का पैदा करने की रहती है। कई दंपत्ति तो लड़के की चाह में न चाहते हुए भी लड़कियों को जन्म दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 में अब तक एक हजार लड़कों के पीछे यहां पर 964 बेटियों ने जन्म लिया है।
प्रदेश का कुल लिंगानुपात जहां 943 है, वहीं उज्जैन जिले का लिंगानुपात 964 है। अब ये कहा जा सकता है कि लाडो प्यारी लगने लगी है। बता दें कि वर्ष 2025 में जिले का लिंगानुपात जहां 915 था वह अब बढ़कर 964 तक पहुंच गया है। वहीं बेटों की चाहत का सीधा असर भी जिले के लिंगानुपात पर दिख रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि उज्जैन लिंगानुपात के मामले में मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे पायदान पर जा पहुंचा है। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में पंजीकृत 1000 गर्भवतियों में से 350 (यानी 35′) हाई रिस्क श्रेणी में हैं। यानी हर तीसरी गर्भवती की जिंदगी खतरे में है। सबसे भयावह आंकड़ा उन महिलाओं का है, जो पहले ही 3 से 9 बेटियों को जन्म दे चुकी हैं। खुद बेटियों से कोई शिकायत न होने के बावजूद, ‘वंश चलाने के लिए बेटा ही चाहिए।