
नई दिल्ली। देश में पहली बार डिजिटल जनगणना की तैयारी के बीच एक बड़ी तकनीकी गलती ने विवाद खड़ा कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट शहर को जनगणना के सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर चीन के शहर मेडोग के नाम से दिखाया गया। इस घटना के सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई और इसे देश की संप्रभुता से जोड़कर देखा जाने लगा।
यह मामला तब सामने आया जब रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी मोहोंतो पांगिंग पाओ ने इस गलती को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर पासीघाट की लोकेशन गलत दिख रही थी, जिससे वह अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। उनके पोस्ट के बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
पोर्टल पर अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को मेडोग दिखाया गया, जो चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में आता है। यह वही इलाका है जिसे लेकर चीन बार-बार दावा करता रहा है। ऐसे में इस गलती को सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि संवेदनशील मुद्दा माना गया और लोगों ने इसे “वर्चुअल तरीके से जमीन छोड़ने” जैसा बताया।
मामला सामने आने के कुछ ही घंटों में जनगणना अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने बताया कि यह समस्या मैप सेवा देने वाली कंपनी के साथ समन्वय करके उसी दिन ठीक कर दी गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक तकनीकी मैपिंग एरर थी।
यह घटना ऐसे समय आई है जब भारत पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ रहा है। इस बार लोग खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। लेकिन इस तकनीकी गलती ने यह भी दिखाया कि डिजिटल सिस्टम में छोटी चूक भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है।
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर दावा करता रहा है और कई जगहों के नाम बदलने की कोशिश भी करता है। भारत सरकार ने हमेशा इन दावों को खारिज किया है और साफ कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में इस तरह की गलती ने संवेदनशीलता और बढ़ा दी। सरकार ने कहा है कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए तकनीकी सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही मैप सेवाओं की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी ताकि देश की सीमाओं और पहचान से जुड़ी कोई भी चूक न हो।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved