
नई दिल्ली: प्रतिबंधित संगठन CPI-माओवादी के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस (Prashant Bose) उर्फ ‘किशन दा’ का शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 80 वर्ष से अधिक उम्र के थे।
जेल में बिगड़ी तबीयत
अधिकारियों के मुताबिक प्रशांत बोस सरायकेला जेल में बंद थे। शुक्रवार तड़के उन्हें अचानक सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगी। हालत बिगड़ने पर सुबह करीब 6 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें रांची के रिम्स अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज शुरू किया।
इलाज के दौरान सुबह 10 बजे मौत
डॉक्टरों के मुताबिक इलाज के दौरान उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। काफी कोशिशों के बावजूद शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल में एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
दीवाली के दिन पुलिस कैंप पर किया था हमला
माओवादी आंदोलन का शुरुआती कमांडर रहे प्रशांत बोस उर्फ किशन दा सुरक्षा बलों के 15 जवानों को मौत के लिए जिम्मेदार थे। वह नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे थे। सन 2021 में दीवाली के दिन प्रशांत बोस और उसकी पत्नी शीला मरांडी ने बड़ी साजिश रचकर अपने साथियों के साथ पुलिस के कैंप पर हमला किया था। इस हमले में 15 जवानों की मौत हो गई थी।
माओवादी संगठन के बड़े नेता थे
पश्चिम बंगाल के मूल निवासी प्रशांत बोस माओवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें CPI-माओवादी के महासचिव नंबाला केशव राव के बाद संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता माना जाता था। वह केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के प्रमुख सदस्य थे। इसके साथ ही वे संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के सचिव भी रह चुके थे।
कई नामों से जाने जाते थे
माओवादी सर्कल में प्रशांत बोस को कई नामों से जाना जाता था। इनमें ‘मनीष’, ‘किशन दा’ और ‘बुद्धा’ प्रमुख हैं। करीब चार दशकों तक सक्रिय रहे बोस को संगठन का बड़ा रणनीतिकार, थिंक टैंक और विचारक माना जाता था।
200 से ज्यादा माओवादी घटनाओं में रहा नाम
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार प्रशांत बोस झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में हुई 200 से ज्यादा माओवादी घटनाओं में शामिल रहे थे। उनकी मौत के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पोस्टमार्टम के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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