ढाका। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार (Mistreatment of Hindus in Bangladesh) और हिंसा जारी है। फरवरी में होने वाले इलेक्शन से पहले एक से बढ़कर एक खतरनाक भड़काऊ बयान (Inflammatory statements) दिए जा रहे हैं। मौलानाओं ने मानो हिंदुओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हुआ है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में एक मौलाना ‘हिंदुओं को वोट देना हराम’ बता रहा है तो एक वीडियो में एक नेता को “बांग्लादेश से मंदिरों को खत्म करने” की बात कहते सुना जा रहा है। बांग्लादेश में मौलाना अपनी सभाओं में हिंदुओं के खिलाफ लगातार भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं।
जिस मौलाना का वीडियो वायरल हुआ है, उसमें उससे एक सवाल पूछा जाता है कि “क्या चुनाव में किसी हिंदू उम्मीदवार को वोट दिया जा सकता है, क्या हिंदू पार्टी को वोट देना चाहिए?” इस सवाल पर मौलाना बिल्कुल है कि “नहीं ये बिल्कुल जायज नहीं है।” इस सवाल पर पहले मौलाना को व्यंग्यात्मक मुस्कान के साथ हंसते देखा जा रहा है और फिर वो कहता है कि ‘हिंदू को वोट देना जायज नहीं है।’ इसके बाद वो अपनी बात को फिर से दोहराता है कि ‘हिंदू को वोट देना जायज नहीं है।’ आगे वो कहता है कि ‘हिंदुओं, काफिरों को वोट देना किसी भी तरीके से जायज नहीं है।’ प्रोग्राम के दौरान वह घोषणा करता है कि किसी भी हिंदू उम्मीदवार या “काफिर” को वोट देना हराम है, यानी इस्लाम में मना है।
बांग्लादेश में पिछले एक सवा महीने में कई हिंदुओं की भीड़ ने हत्या कर दी है। कई देशों ने बांग्लादेश में हिंदुओं से होने वाली हिंसा की आलोचना की है, लेकिन मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार लगातार ऐसे तत्वों का समर्थन कर रही है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी बेलगाम हो चुके हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कम से कम पांच हिंदू पुरुषों की हत्या कर दी गई है। जिसके बाद भारत ने बांग्लादेश से देश में सांप्रदायिक घटनाओं से सख्ती से निपटने को कहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि “हम चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर बार-बार होने वाले हमलों का एक परेशान करने वाला पैटर्न देख रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से “तेजी और सख्ती से” निपटा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सांप्रदायिक हमलों को निजी दुश्मनी या राजनीतिक मतभेदों से जोड़ने की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति रही है। जायसवाल ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि “ऐसी अनदेखी अपराधियों को और बढ़ावा देती है और अल्पसंख्यकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना को गहरा करती है।”
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