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मॉरीशस ने मालदीव के साथ तोड़े सभी कूटनीतिक रिश्ते, जानिए क्‍या है इस विवाद की वजह?

February 28, 2026

माले। मॉरीशस सरकार (Mauritius Government) ने शुक्रवार, 27 फरवरी को अचानक एक बड़ा कूटनीतिक (Diplomatic) कदम उठाते हुए मालदीव (Maldives) के साथ अपने सभी राजनयिक संबंधों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह सख्त फैसला चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता को लेकर मालदीव के बदलते रुख के कारण लिया गया। दोनों देश भारत के मित्र हैं, लेकिन इस विवाद ने उनके संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है।

विवाद का कारण
मॉरीशस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, मालदीव ने हाल ही में चागोस द्वीप समूह के मामले में अपना रुख बदल लिया है। अब मालदीव मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता नहीं देता और मॉरीशस तथा ब्रिटेन के बीच हुए हालिया समझौते पर भी आपत्ति जता रहा है। इसी कारण मॉरीशस की कैबिनेट ने मालदीव के साथ रिश्ते तोड़ने का निर्णय लिया और इसे आधिकारिक रूप से सूचित किया।


  • मॉरीशस का आधिकारिक रुख
    मॉरीशस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय हितों की रक्षा और संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, कैबिनेट ने चागोस और डिएगो गार्सिया से जुड़े अन्य कानूनी और कूटनीतिक मामलों पर भी चर्चा की।

    विवाद की पृष्ठभूमि
    चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर के मध्य में स्थित 60 से अधिक छोटे द्वीपों का समूह है। इसका सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया है, जो अमेरिका के रणनीतिक सैन्य अड्डे के रूप में प्रयोग होता है। 1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस से चागोस को अलग कर दिया और इसे ब्रिटिश-हिंद महासागर क्षेत्र घोषित किया। इसके लिए मॉरीशस को केवल 30 लाख पाउंड का मुआवजा मिला।

    डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थापित करने के लिए ब्रिटेन ने 1967-1973 के बीच लगभग 1,500 से 2,000 मूल निवासियों को जबरन वहां से हटा कर मॉरीशस और सेशेल्स में बसाया।

    अंतरराष्ट्रीय फैसले और हालिया समझौता
    2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने सलाहकारी राय में कहा कि चागोस को मॉरीशस से अलग करना गैर-कानूनी था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ब्रिटेन से द्वीप लौटाने को कहा। दशकों की कानूनी लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ब्रिटेन और मॉरीशस ने एक समझौता किया, जिसमें ब्रिटेन ने मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता दी, जबकि अमेरिकी सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर लंबी अवधि के पट्टे पर बना रहेगा।

    मालदीव का नया रुख
    पहले मालदीव मॉरीशस के दावे का समर्थन करता था, लेकिन अब उसने अपना रुख बदल दिया है। मालदीव अब चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता और ब्रिटेन के साथ हुए समझौते पर आपत्ति जता रहा है। इसी कारण मॉरीशस ने अपने सभी राजनयिक संबंध तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।

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