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ईरानी स्कूल पर मिसाइल हमले में 168 बच्चों की मौत, अमेरिकी जांच में चौंकाने वाला खुलासा

March 12, 2026

वॉशिंगटन। ईरान के मीनाब शहर (Meenab city) में एक स्कूल पर हुए भीषण मिसाइल हमले (Massive missile attack) को लेकर अमेरिकी सैन्य जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक इस हमले के लिए खुद अमेरिका जिम्मेदार हो सकता है। इस हमले में करीब 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 168 मासूम बच्चे शामिल थे। यदि यह आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जाएगी।



  • पुराने खुफिया डेटा से हुई चूक

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह हमला Minab शहर के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुआ। जांच में सामने आया कि United States Central Command ने लक्ष्य तय करने के लिए Defense Intelligence Agency (DIA) के पुराने खुफिया डेटा का इस्तेमाल किया था।

    असल में टॉमहॉक मिसाइल का निशाना स्कूल नहीं, बल्कि उसके पास स्थित एक ईरानी सैन्य ठिकाना था। यह स्कूल पहले उसी सैन्य परिसर का हिस्सा था, लेकिन बाद में इसे अलग कर दिया गया था।

    बताया जा रहा है कि Shajareh Taybeh Elementary School 2017 तक सैन्य बेस से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वहां दीवार बनाकर परिसर अलग कर दिया गया और वॉच टावर भी हटा दिया गया। स्कूल की इमारत को चमकीले रंगों से रंगा गया था और ऑनलाइन मैप्स में भी इसे स्पष्ट रूप से “स्कूल” के रूप में दर्ज किया गया था।

    यह हमला शनिवार सुबह हुआ, जो ईरान में स्कूल सप्ताह का पहला दिन होता है और उस समय स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे।

    क्या AI सिस्टम से हुई गलती?

    इस त्रासदी के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह चूक किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की वजह से हुई। ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिकी सेना तकनीक और एआई आधारित टार्गेटिंग सिस्टम पर काफी निर्भर है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना वॉर-टेक कंपनी Palantir Technologies के “मेवेन स्मार्ट सिस्टम” का इस्तेमाल करती है। इसमें एआई कंपनी Anthropic के मॉडल “Claude” का उपयोग किया जाता है, जो रियल-टाइम लोकेशन और टार्गेटिंग डेटा प्रदान करता है।

    प्रारंभिक आशंका है कि एआई सिस्टम स्कूल की बदली हुई लोकेशन और उपयोग को अपडेट करने में विफल रहा, जिससे यह घातक गलती हुई।

    अमेरिका का आधिकारिक रुख

    अमेरिका ने नागरिक ठिकानों पर हमला न करने की नीति दोहराते हुए कहा है कि मामले की जांच जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुरुआत में दावा किया कि ईरान ने खुद ही स्कूल पर बमबारी की होगी क्योंकि उसके हथियार अक्सर सटीक नहीं होते। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि वह जांच के नतीजों का इंतजार करेंगे और Pentagon की रिपोर्ट को स्वीकार करेंगे।

    इस घटना को लेकर अमेरिकी संसद में भी सवाल उठने लगे हैं। 45 से अधिक डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने रक्षा सचिव Pete Hegseth को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। वहीं रिपब्लिकन सीनेटर Kevin Cramer और सीनेटर Tim Kaine ने भी इस घटना की गहन जांच की मांग की है।

    ईरान का तीखा आरोप

    इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने सोशल मीडिया पर हमले का वीडियो साझा करते हुए इसे “जघन्य युद्ध अपराध” बताया।

    वहीं ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने सामूहिक कब्रों के ड्रोन फुटेज साझा करते हुए कहा कि यह हमला निर्दोष बच्चों की हत्या है और इसे बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

    यह घटना पहले से ही तनावपूर्ण Iran-Israel संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है और युद्ध में एआई तकनीक के इस्तेमाल पर भी नई बहस शुरू हो गई है।

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