
प्रदेश में मठ-मंदिरों, मदरसों और वक्फ बोर्ड से सरकारी नियंत्रण हटाने की मांग उठी है। मुस्लिम समाज संगठन ने मांग की है कि इन धार्मिक संस्थाओं को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना अब्दुल समद ने कहा कि मुस्लिम संगठन पिछले 40 वर्षो से यह मांग उठाते आ रहे हैं। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समिति का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं को भी अपनी कमेटी चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी नियंत्रण के बावजूद धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं इसलिए हर धर्म को अपने हिसाब से स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार मिलना चाहिए।
वहीं महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज ने इस मांग का विरोध करते हुए मंदिर, मठ और मदरसा बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण बनाए रखने की पैरवी की। उन्होंने आशंका जताई कि मदरसों से सरकारी नियंत्रण हटने पर वहां आतंकवादी तैयार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज आतंकवादियों को पाकिस्तान से बुलाया जा रहा है और कल हिंदुस्तान के मदरसों में आतंकवादी तैयार कर देश को बर्बाद करने की कोशिश हो सकती है। मुस्लिम समाज संगठन की मांग का कांग्रेस ने समर्थन किया है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि मंदिरों और वक्फ बोर्ड जैसी धार्मिक संस्थाओं पर पूर्णकालिक सरकारी नियंत्रण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने और दूसरे धर्म का सम्मान करने की स्वतंत्रता देता है इसलिए आस्था पर सरकारी नियंत्रण उचित नहीं है।
वहीं इस मुद्दे पर भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि कानून और सरकार किसी मुस्लिम समुदाय के हिसाब से नहीं बल्कि संविधान के अनुसार चलेंगे। उन्होंने कहा कि देश में संविधान से ऊपर कोई नहीं है और सभी को संविधान के दायरे में रहना चाहिए। इस तरह धार्मिक संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण के मुद्दे पर मुस्लिम समाज संगठन, संत समाज, कांग्रेस और भाजपा के अलग-अलग रुख सामने आए हैं।
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