
नई दिल्ली. मध्य प्रदेश (MP) के धार (Dhar) जिले में स्थित विवादित कमल मौला मस्जिद (Kamal Maula Mosque) -भोजशाला मंदिर (Bhojshala temple) परिसर की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाई कोर्ट में पेश कर दी है. 2,000 से ज्यादा पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा ढांचे की जगह पर पहले परमार राजाओं (Parmar kings) के शासनकाल की एक विशाल प्राचीन संरचना मौजूद थी.
सर्वे के मुताबिक, मौजूदा इमारत का निर्माण पुराने मंदिरों के हिस्सों को नष्ट करके और उन्हें दोबारा इस्तेमाल करके किया गया है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने सोमवार को सभी पक्षों को इस रिपोर्ट पर अपने विचार और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया है.
हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है और एएसआई की खोज को अपने दावे का समर्थन बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता है और रिपोर्ट के निष्कर्षों को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है.
ASI ने क्या दावा किया?
एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक, परिसर में वास्तुशिल्प अवशेष, मूर्तिकला के टुकड़े, साहित्यिक ग्रंथों वाले शिलालेखों के बड़े स्लैब और नागकर्णिका शिलालेख मिले हैं. ये सभी प्रमाण इशारा करते हैं कि यहां एक बड़ी संरचना थी, जो साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से जुड़ी थी. वैज्ञानिक जांच के आधार पर इस पूर्व-मौजूदा संरचना को 10वीं-11वीं शताब्दी के परमार काल का माना गया है.
सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा इमारत बेसाल्ट की एक पूर्व-मौजूदा संरचना के ऊपर बनाया गया है, जिसका निचला हिस्सा अभी भी आधार के रूप में मौजूद है. एएसआई ने नोट किया कि अलंकृत स्तंभों और दीवार के खंभों की कला और वास्तुकला से पता चलता है कि वे पहले के मंदिरों का हिस्सा थे और मस्जिद के बरामदे (कोलोनेड्स) बनाते वक्त उनका फिर से उपयोग किया गया था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों, धार्मिक प्रतीकों और संस्कृत व प्राकृत के शिलालेखों की मौजूदगी पाई गई है, जो अरबी और फारसी शिलालेखों से पुराने हैं. इसके अलावा, इंडो-सासैनियन काल (10वीं-11वीं शताब्दी) से लेकर स्वतंत्र भारत तक के कुल 31 चांदी, तांबे और एल्युमिनियम के सिक्के मिले हैं. सबसे पुराने सिक्के परमार राजाओं के वक्त के हैं, जब धार उनकी राजधानी थी.
दावे और आपत्तियां
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के आशीष गोयल ने कहा कि रिपोर्ट उनके इस दावे का समर्थन करती है कि भोजशाला एक परमार कालीन स्मारक है, जिसे क्षतिग्रस्त कर नई इमारत खड़ी की गई. वहीं, मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद ने कहा कि वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां दर्ज करेंगे. उनका आरोप है कि एएसआई ने उनके पुराने विरोधों की अनदेखी की और पिछले दरवाजे से रखी गई वस्तुओं को सर्वे में शामिल किया है.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved