इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) के (Lahore) शहर में इन दिनों ऐतिहासिक पहचान (Historical Identity) को लेकर एक नई पहल चर्चा में है। यहां कई इलाकों और चौकों के नाम बदलकर उन्हें फिर से उनके पुराने हिंदू दौर वाले नाम दिए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत सुन्नतनगर का नाम बदलकर संतनगर कर दिया गया है, जबकि इस्लामपुरा को दोबारा कृष्णनगर के नाम से पहचाना जाने लगा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में लाहौर के कई स्थानों के नाम बदले गए हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को फिर से सामने लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस पूरी कवायद को “लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल” प्रोजेक्ट का हिस्सा माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना की शुरुआत Maryam Nawaz की पहल पर हुई। पंजाब सरकार की एक बैठक में लाहौर की पुरानी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने पर चर्चा हुई थी। इसी दौरान यह फैसला लिया गया कि शहर के कुछ इलाकों को उनके ऐतिहासिक नाम वापस दिए जाएं।
बताया जा रहा है कि इस पहल के पीछे तर्क यह है कि लाहौर का इतिहास केवल एक दौर से जुड़ा नहीं है, बल्कि यहां हिंदू, सिख और मुस्लिम सभ्यताओं की साझा विरासत रही है। प्रशासन का मानना है कि पुराने नामों की वापसी से शहर की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित किया जा सकेगा।
जानकारी के अनुसार, इन इलाकों के मूल नाम पहले हिंदू संस्कृति से जुड़े थे, लेकिन 1990 के दशक में भारत में Babri Masjid demolition के बाद पाकिस्तान में कई जगहों के नाम बदल दिए गए थे। उस समय विभिन्न सरकारों के दौर में हिंदू पहचान वाले नामों की जगह मुस्लिम नाम रखे गए थे।
दिलचस्प बात यह है कि नाम बदलने के इस फैसले पर अब तक पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठनों की ओर से कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन ने इस मुद्दे को सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर पेश किया है, न कि धार्मिक बदलाव के रूप में।
लाहौर में जिन प्रमुख स्थानों के नाम बदले गए हैं, उनमें इस्लामपुरा को कृष्णनगर, सुन्नतनगर को संतनगर, मौलाना जफर चौक को लक्ष्मी चौक और बाबरी मस्जिद चौक को फिर से जैन मंदिर चौक नाम दिया गया है। इसके अलावा मुस्तफाबाद अब धर्मपुरा, अल्लामा इकबाल रोड अब जेल रोड और फातिमा जिन्ना रोड को क्वींस रोड के नाम से जाना जा रहा है।
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