
नई दिल्ली। भारत (India) में ईंधन संकट (Fuel Crisis) गहराने की आशंका के बीच भारतीय नौसेना संकटमोचक (Indian Navy Troubleshooters) की भूमिक निभा सकती है। खबर है कि भारत की तरफ से अपने युद्धपोत भेजने पर विचार किया जा रहा है, ताकि मिडिल ईस्ट (Middle East) में फंसे भारतीय जहाजों को निकाला जा सके। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोनों ओर बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में भारतीय अधिकारी कैप्टन पीसी मीणा के हवाले से लिखा कि भारत भी अपने युद्धपोत भेजने पर विचार कर रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जहाज मालिकों की तरफ से एस्कॉर्ट का अनुरोध किया गया था, जिसके बाद युद्धपोत भेजने के फैसले पर विचार किया जा रहा था।
पाकिस्तान ने भेजे युद्धपोत
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान नौसेना ने सोमवार को कहा कि वह अपने जहाजों को निकालने के लिए युद्धपोतों को मिडिल ईस्ट भेज रहा है। साथ ही कहा कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के दो जहाज पहले ही नौसेना की निगरानी में आ गए हैं। हालांकि, नौसेना ने यह जानकारी नहीं दी कि किन रास्तों के जरिए टैंकर लाए जा रहे हैं। पाकिस्तान अधिकांश नेचुरल गैस कतर और कच्चा तेल सऊदी अरब और यूएई से आयात करता है।
पीएम मोदी ने दिए निर्देश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने को कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और कीमत पर पश्चिम एशिया संघर्ष का असर न झेलना पड़े। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी सक्रिय रूप से यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर न भुगतना पड़े, क्योंकि भारत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयातक है।
प्रधानमंत्री ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर देश में ऊर्जा की स्थिति पर चर्चा की।
अन्य रास्ते भी देख रहा भारत
सूत्रों ने कहा कि भारत, जो अपने अधिकांश ऊर्जा उत्पाद पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है, अब अपनी खरीद में विविधता लाने के साथ अन्य देशों से भी ऊर्जा संसाधन ले रहा है- जिसमें अमेरिका, रूस, वेनेजुएला, ऑस्ट्रेलिया तथा अन्य महासागरीय देश शामिल हैं। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच, भारत ने कहा है कि एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप्ड रसोई गैस को प्राकृतिक गैस का उपयोग करने वाले अन्य सभी क्षेत्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि सरकार ने घरों और परिवहन क्षेत्रों के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के संबंध में आवंटन में फेरबदल किया है।
भारत में होटल और रेस्तरां पर संकट
एलपीजी सिलेंडर की कमी से जूझ रहे होटल कारोबारियों के संगठन ने मंगलवार को कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो देश भर में खासकर मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों के कई होटल और रेस्तरां अगले दो दिन में अपना कामकाज बंद करने को मजबूर हो सकते हैं। संगठन ने मामले के समाधान के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष सागर दरयानी ने कहा कि रेस्तरां खाने की सीमित सुविधा रखने या अलग-अलग समय पर खुलने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। दरयानी ने कहा, ‘फिलहाल लोगों के पास एलपीजी सिलेंडर का एक से दो दिन का स्टॉक है। अगर एक-दो दिन में आपूर्ति नहीं हुई तो इन रेस्तरां को बंद करना पड़ेगा। यह स्थिति मुख्य रूप से बेंगलुरु, पुणे, मुंबई जैसे शहरों में है।’
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