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नेपाल : कैसे सुशीला कार्की बन सकती हैं नेपाल की प्रधानमंत्री, रेस में और चार नाम

September 11, 2025

नई दिल्ली. नेपाल (Nepal) की कमान अब किसके हाथों में होगी, ये यक्ष प्रश्न सभी के जेहन में गूंज रहा है, क्योंकि केपी ओली (KP Oli) भारी हिंसा और प्रदर्शन के बाद पद से इस्तीफा दे चुके हैं. नेपाल का भविष्य किसके हाथ में सौपा जाए, इसे लेकर Gen-Z की एक विशाल वर्चुअल बैठक हुई. इसमें देश के भावी प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों पर काफी मंथन हुआ, इस ऑनलाइन बैठक में 5000 से ज़्यादा सदस्यों ने हिस्सा लिया. इस वर्चुअल बैठक में पूर्व चीफ जस्टिस (Former Chief Justice) सुशीला कार्की (Sushila Karki) को बहुमत मिला है. हालांकि ये इतनी आसान प्रक्रिया नहीं है, क्योंकि सुशीला कार्की अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार करती हैं, तो नेपाल के विशेषज्ञों के मुताबिक वह सबसे पहले सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगदेल (Ashok Raj Sigdel) से मिलेंगी और उसके बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की मंजूरी प्राप्त करेंगी.

बता दें कि Gen-Z के एक प्रतिनिधि ने कहा कि काठमांडू के मेयर बालेन शाह इस पीढ़ी में सबसे लोकप्रिय हैं, हालांकि उन्होंने बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया. नेपाल प्रेस के एक सूत्र के अनुसार उनके जवाब न देने के कारण चर्चा अन्य संभावित उम्मीदवारों पर केंद्रित हुई, जिसमें सबसे अधिक समर्थन पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को मिला.


  • सुशील कार्की का नाम Gen-Z सदस्यों ने प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया था, उन्होंने 1000 लिखित समर्थन पत्रों की मांग की थी. सूत्रों के अनुसार उन्हें 2500 से अधिक लोगों का समर्थन मिला है.

    कौन-कौन से नाम चर्चा में?
    चर्चा में अन्य संभावित उम्मीदवारों में कुलमन घीसिंग, सागर ढकाल और हरका संपांग शामिल हैं. रोचक बात ये है कि रैंडम नेपाली नाम के एक मशहूर यूट्यूबर को भी काफी वोट मिले हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि वे तभी प्रधानमंत्री पद के लिए तैयार होंगे, जब कोई और उम्मीदवार इस पद के लिए राज़ी न हो.

    कौन हैं सुशीला कार्की?
    सुशीला कार्की 72 वर्षीय नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं. उन्होंने 2016 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनकर इतिहास रचा था. उनकी नियुक्ति तत्कालीन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने की थी, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली संवैधानिक परिषद की सिफारिश पर आधारित थी. ये नेपाल के न्यायिक और लैंगिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना गया था. सुशीला कार्की ने न्यायपालिका में आने से पहले शिक्षिका के रूप में काम किया था. उन्होंने एक निडर, सक्षम और भ्रष्टाचार-मुक्त न्यायविद के रूप में पहचान बनाई. उनका कार्यकाल साहसिक फैसलों और राजनीतिक विवादों, खासकर वरिष्ठ मंत्रियों से जुड़े मामलों में सक्रिय होने के लिए जाना जाता है.

    संविधान मसौदा समिति की सदस्य रही हैं सुशीला
    सुशीला कार्की 2006 की संविधान मसौदा समिति की सदस्य भी रही हैं, जहां उनके योगदान को व्यापक सराहना मिली. 2009 में उन्हें नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश बनाया गया और 2010 में स्थायी न्यायाधीश बनीं. 2016 में उन्होंने कुछ समय तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम किया. और जुलाई में औपचारिक रूप से नियुक्त होकर नेपाल में महिलाओं के लिए न्यायपालिका में सभी बाधाएं दूर कीं.

    सामाजिक बदलाव का प्रतीक है सुशीला कार्की का करियर
    सुशीला कार्की का करियर नेपाल में सामाजिक बदलाव का प्रतीक रहा है. 2008 में नेपाल ने हिंदू राज्य से धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनने का निर्णय लिया, जिसके बाद महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व और वंश के संवैधानिक अधिकार मिले. कार्की का न्यायपालिका में उभार इस लंबी लड़ाई और महिलाओं के अधिकारों की सफलता का प्रतीक बन गया.

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