
नई दिल्ली। भारत की यात्रा (Visiting India) के बाद अब नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Nepal’s Foreign Minister Shishir Khanal ) चीन (China) पहुंच गए हैं। नेपाल में नई सरकार बनने के बाद यह बालेंद्र शाह के किसी प्रतिनिधि की यह पहली चीन यात्रा है। यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद को लेकर चर्चा एक बार फिर गरम है। पीएम बालेंद्र शाह ने तो पिछले दिनों कह दिया था कि इसके लिए वह यूके की मध्यस्थता की मांग करेगा। उनकी इस बात पर भारत ने कड़ी आपत्ति जाहिर की थी।
नेपाल का हितैषी बन रहा चीन
नेपाली विदेश मंत्री ने चीन के टॉप डिप्लोमैट वांग यी से सोमवार को मुलाकात की। वांग ने कहा, पड़ोसी के हितों को देखते हुए चीन नेपाल को हमेशा आगे रखता है। उन्होंने कहा कि चीन नेपाल की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखने के लिए पूरा समर्थन करेगा। जानकारों का कहना है कि भारत के साथ संबंधों की वजह से नेपाल की अर्थव्यवस्था को भी बल मिला है। ऐसे में चीन को यह साबित करना पड़ रहा है कि वह भी नेपाल का हितैषी है।
भारत और नेपाल के बीच लगभग 1088 किलोमीटर की सीमा को लेकर विवाद रहा है। हालांकि यह विवाद कोई आज का नहीं है। आजादी से पहले से ही इस तरह का विवाद चला आ रहा है जिसमें कभी किसी तरह की हिंसा नहीं हुई। इसी महीने खनाल दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा था कि नेपाल अब पुराने विचार और व्यवस्थाओं से पूरी तरह मुक्त है और भारत के साथ हर कीमत पर संबंध बेहतर करना चाहता है।
क्यों खटाई में पड़े नेपाल और चीन के संबंध
जानकारों का कहना है कि चीन की ओर से प्रस्तावित ‘बेल्ट ऐंड रोड’ प्रोजेक्ट को पूरा करने में देरी की वजह से नेपाल के साथ संबंध खटाई में पड़ गए हैं। नेपाल चीन के इस प्रोजेक्ट में 2017 में ही शामिल हुआ था। हालांकि नई सरकार की रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है। इसीलिए वांग ने नेपाली विदेश मंत्री से वादा किया है कि वह नेपाल में बिजली उत्पादन,सड़कों के निर्माण, पोर्ट और एविएशन क्षेत्र में पूरा सहयोग करेंगे।
जानकारों का कहना है कि नेपाल में जिस तरह से सत्ता परिवर्तन हुआ है वह शायद चीन को रास ना आया हो। पड़ोस में इस तरह के सत्ता परिवर्तन से चीनी नेतृत्व के मन में भी डर बैठ जाता है। इसीलिए चीन सोशल मीडिया पर नियंत्रण रखता है। चीन का मानना है कि इस तरह के परिवर्तन उसके भी हित में नहीं हैं और आने वाले समय में सत्ता को चुनौती मिल सकती है।
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