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Breast Cancer के एडवांस स्टेज में पहुँच चुकी मरीजों के लिए नेक्स्ट जेनरेशन ट्रीटमेंट के विकल्प

February 04, 2026

इंदौर! भारत (India) में महिलाओं को प्रभावित करने वाले कैंसर (Breast Cancer) का सबसे आम रूप ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) है। महिलाओं में सभी तरह के कैंसर में ब्रेस्ट कैंसर का अनुपात 14 प्रतिशत है।[i] अनुमान है कि हर 29 में से 1 महिला को ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) होता है।[ii] इनमें से 40% से ज्यादा महिलाओं में ब्रेस्ट  कैंसर (Breast Cancer) का पता उसके उन्नत अवस्था (स्टेज 3 या 4) में जाकर होता है। मौजूदा महामारी के कारण अनेक बाधाएँ उत्पन्न हो गई हैं। इससे निदान में देरी हो रही है और उपचार के पालन में कमी आ रही है। नतीजतन, ग्रामीण और शहरी इलाकों में सीमित जाँच और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही जैसी चुनौतियाँ बढ़ गई हैं। साथ ही, सामाजिक कलंक, कैंसर का पता चलने या परिवार में इसकी चर्चा करने का डर, स्तन की जाँच में शर्म होना और वैकल्पिक प्राथमिकतायें आदि अन्य चुनौतियाँ हैं जिनके कारण महिलाएँ अपनी सेहत की उपेक्षा करती हैं और जाँच तथा देखभाल में देरी होती है।  इन सभी कारणों से रोग के उन्नत चरण में मरीज के जीवित बचने की दर कम हो जाती है।

जोखिम के कारकों के प्रति जागरूकता स्वयं स्तन की जाँच करने के लिए मरीजों को प्रेरित करती है। इसके अलावा जाँच कराने से समय पर इस बीमारी का पता चल जाता है। जोखिम के कारकों में अधिक उम्र कैंसर का पारिवारिक इतिहास, कतिपय जीन्स का, स्तन विरासत में प्राप्त होना शामिल है। जिन महिलाओ में रजोस्राव पहले (12 साल की उम्र से पहले) शुरू हो जाता है और जिन महिलाओं की रजोनिवत्ति देर से होती है (55 साल के बाद) उनमें स्तन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा जोखिम के अन्य कारकों में धूम्रपान करना, ज्यादा शराब का सेवन करना, मोटापा, शारीरिक गतिविधियों में कमी और रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी कराना शामिल है।


  • महिलाओं में 30 से 50 साल तक की उम्र काफी प्रॉडक्टिव मानी जाती है। इस समय उन्हें स्तन कैंसर होने का भी काफी खतरा होता है। युवतियों में इस तरह के मामलों में बढ़ोतरी होने लगी है। 25 वर्ष से कम उम्र की भी अनेक महिलाएँ स्तन कैंसर से प्रभावित हो रही हैं।

     

     सीबीसीसी कैंसर हॉस्पिटल, इंदौर के मेडिकल ऑन्‍कोलॉजिस्‍ट डॉ. राकेश तारण ने कहा, “आजकल ब्रेस्‍ट कैंसर इंदौर और देशभर में कैंसर के सबसे सामान्य रूप के तौर पर सामने आया है। यह सर्वाइकल कैंसर से आगे निकल चुका है और महिलाओं को होने वाले कैंसर के कुल मामलों में इसका अनुपात 40% है। दुर्भाग्‍य से, ब्रेस्‍ट कैंसर का जाँचों द्वारा आसानी से निदान हो सकने के बावजूद 50-60% मामले इस बीमारी की एडवांस्‍ड स्‍टेजेस में आकर पता चलते हैं। आमतौर पर थर्ड या फोर्थ स्‍टेज में पता चलने के कारण इसके इलाज में कठिनाइयाँ आती हैं। निदान में अक्सर इसलिए देरी होती है क्योंकि लक्षण प्रकट होने के बावजूद महिलाएँ सामाजिक कलंक या जागरूकता के कमी के कारण मदद लेने में दर या संकोच का अनुभव करती हैं। इंदौर में 30 से 50 साल के बीच की महिलाओं को ब्रेस्‍ट कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक है, जिसके पीछे पश्चिमीकरण के प्रभाव में जीवनशैली में बदलाव, मोटापा, तनाव, छोटा परिवार और प्रजनन का स्थगन जैसे कारण हैं।”



  •  स्तन कैंसर होने का मतलब जीवन का अंत नही है। आज एडवांस स्टेज या कैंसर की तीसरी और चौथी स्टेज पर पहुँच चुकी मरीजों के लिए भी इलाज के कई विकल्प मौजूद है, जिन्होंने मरीजों में स्वस्थ होने की उम्मीद जगाई है। इसलिए मरीजों को अपने इलाज के विकल्पों पर अपने कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर से बातचीत करनी चाहिए। हार्मोन पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर भी महिलाओं को होने वाले कैंसर का सबसे आम रूप है और इससे पीड़ित मरीजों के लिए मॉलिक्यूलर थेरेपी जैसे नए उपचार काफी प्रभावी साबित हुए हैं। उपचार में प्रगति होने के साथ अब 60% से 70% मरीजों का शरीर इलाज को काफी पॉजिटिव तरीके से स्वीकार कर रहा है। इससे मरीज बेहतर ढंग से सामान्य जिंदगी जीने में सक्षम हुई हैं। इलाज के तरीकों में आए नए बदलाव से कैंसर को ऐसी पुरानी बीमारी के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें बेहतर प्रबंधन की जरूरत होती है।”

    कई मरीजों और उनके परिवारों का मानना है कि स्तन कैंसर की एडवांस स्टेज जीवन के अंत का संकेत होता है। कई भारतीय महिलाएँ और उनकी देखभाल करने वाले परिजन मरीजों के बेहतर इलाज पर खर्च करने की जगह परिवार के भविष्य के लिए पैसे जोड़ने में विश्वास रखते हैं।

     

    इस अक्टूबर में स्तन कैंसर जागरूकता माह मनाया जा रहा है। अब मरीजों और उनकी देखभाल करने वाले परिजनों को एडवांस स्टेज में उपलब्ध स्तन कैंसर के इलाज की जानकारी देने की काफी जरूरत महसूस की जा रही है।

     

    अगर आप बेस्ट कैंसर के एडवांस स्टेज की मरीज हैं तो अपनी बीमारी का बेहतर ढग से प्रबंधन करने के लिए अपने कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें, जिससे आप परेशानी पैदा करने वाले लक्षणों को कम कर बेहतर जीवन स्तर और देखभाल की सुविधा हासिल कर सकती हैं।     

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