
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने ईरान के साथ जारी जंग के बीच एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान बिना शर्त सरेंडर करे, इसके अलावा और कोई डील नहीं होगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा-ईरान के साथ बिना शर्त सरेंडर के अलावा कोई डील नहीं होगी। हम एक महान और स्वीकार्य लीडर का चुनाव करेंगे और ईरान को बर्बादी के कगार से वापस लाने कि लिए बना थके काम करेंगे। साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया में अमेरिका को शामिल करने पर भी जोर दिया है।
स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध : ईरान
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि ईरान की ओर से यह कहा गया है कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-‘कुछ देशों की ओर से मध्यस्थता के प्रयास शुरू किए गए हैं। उन्हें हम साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि हम क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अपने देश के सम्मान और अधिकार की रक्षा करने में हमें जरा भी हिचकिचाहट नहीं है।
ईरानी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि ईरान बिना शर्त सरेंडर करे। ट्रंप ने लिखा कि ईरान को बर्बादी के कगार से वापस लाने के लिए बिना थके काम करेंगे। हम ईरान को आर्थिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा बड़ा, बेहतर और मजबूत बनाएंगे। ईरान का भविष्य शानदार होगा। उन्होंने ईरान को फिर से महान बनाने की अपील भी की।
लंबा खिंचेगा संघर्ष?
बता दें कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद यह संघर्ष लंबा खिंचता नजर आ रहा है। इस युद्ध का असर पश्चिमी एशिया तथा उससे बाहर के 14 देशों पर पड़ा है। 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिमी एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। ईरान के हमले से पश्चिमी एशिया के कई देश प्रभावित हुए।
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले जारी
इतना ही नहीं अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत पर हमला कर उसे डुबो दिया। इस हमले में करीब 80 नौसैनिकों की मौत हो गई। वहीं इस बीच ईरान ने अजरबैजान पर भी मिसाइल दागकर उसे दहला दिया। वहीं लेबनान के दक्षिणी इलाके में इजरायल हिजबुल्ला के ठिकानों पर जबरदस्त हमले कर रहा है। इस युद्ध के चलते तेल और गैस की आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा है। इस युद्ध में ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 120 से अधिक लोग और इजराइल में लगभग एक दर्जन लोग मारे गए हैं। हमलों में छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।
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