
इंदौर। आगामी मास्टर प्लान का प्रारूप कब प्रकाशित होगा, इसकी जानकारी भोपाल में बैठे किसी भी आला अफसर को नहीं है। दूसरी तरफ निवेश क्षेत्र में शामिल 79 गांवों में धारा 16 के तहत सालभर पहले धड़ाधड़ करोड़ों रुपए की उगाई के साथ अभिन्यास मंजूरी दी जा रही थी, जिस पर मुख्य सचिव ने रोक लगवाई, तो अब जमीनी जादूगरों ने नगर तथा ग्राम निवेश के साथ-साथ नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के आला अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर धारा 23 (क) के तहत भू-उपयोग परिवर्तन की जुगाड़ शुरू कर दी। हालांकि बीते वर्षों में कई जमीनों के भू-उपयोग परिवर्तित किए गए और अभी चार दिन पहले ही इंदौर से भू-उपांतरण की फाइलें भोपाल संचालनालय को भेजी गई है, जिसमें ग्राम अलवासा, राहुखेड़ी, छोटा बांगड़दा और कनाडिय़ा की हरियाली, खेती से लेकर पीएसपी उपयोग की जमीनों को आवासीय करवाया जाना है। दूसरी तरफ पीपल्याराव की जमीन के भू-उपयोग परिवर्तन को लेकर अब भोपाल तक हल्ला मच गया है, जिसका भंडाफोड़ कल अग्निबाण ने किया था।
अदालती आदेशों की मनमानी व्याख्या करते हुए संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश ने धारा 23 (क) के तहत पीपल्याराव की 11 हिस्सों में बंटी जैन परिवार की 1.874 हेक्टेयर यानी लगभग 2 लाख स्क्वेयर फीट आमोद-प्रमोद और मार्ग उपयोग की जमीन का उपयोग आवासीय करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए दावे-आपत्तियां आमंत्रित की। इंदौर के एक जादूगर विजयश्री ग्रुप के राजेन्द्र जैन और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर इस जमीन का उपयोग परिवर्तन कर करोड़ों रुपए कमवाने का खेला किया गया, जिसके चलते वल्लभ भवन तक इसका हल्ला मचा है और अब आला अधिकारियों द्वारा मामले की जांच कराने और अदालती आदेशों की नए सिरे से पड़ताल करने की बात कही जा रही है।
दूसरी तरफ इंदौर का मास्टर प्लान 2041 फिलहाल अधर में ही पड़ा है। कुछ समय पूर्व विभागीय मंत्री ने भी दावा किया था कि जल्द ही प्रारुप प्रकाशन हो जाएगा, मगर उसके भी अते-पते नहीं हैं। दूसरी तरफ 79 गांवों, जिनमें अभी अभिन्यास मंजूरी पर रोक लगी है, उनमें से कई जमीनों के अभिन्यास धारा 16 के तहत विशेष अनुमति लेकर मंजूर किए गए और 12 से 15 लाख रुपए प्रति एकड़ तक की राशि का लेन-देन भी हुआ। जब इसका हल्ला अग्निबाण ने मचाया तो मुख्य सचिव अनुराग जैन ने यह खेल भी बंद करवा दिया और बीते एक साल से धारा 16 में एक भी फाइल मंजूर नहीं हुई है। मगर जादूगरों ने धारा 23 (क) की जुगाड़ फिर से शुरू की और उसके जरिए मौजूदा मास्टर प्लान में परिवर्तन करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नगर तथा ग्राम निवेश इंदौर कार्यालय ने संचालनालय भोपाल को चार प्रकरणों की जानकारी भेजी है। हालांकि भू-उपांतरण की प्रक्रिया संचालनालय द्वारा ही की जाएगी। इसमें ग्राम अलवासा, तहसील हातोद के खसरा नम्बर 13/1/2, 18/2, 19, 20 व अन्य सर्वे नम्बरों की साढ़े 7 हेक्टेयर मार्ग और खेती की जमीन को आवासीय किया जाना है। इसी तरह राहुखेड़ी तहसील सांवेर के खसरा नम्बर 27/1, 35/1, 36, 37/1 और अन्य की 6.148 हेक्टेयर जमीन आवासीय और ग्रीन बफर से पूर्ण आवासीय करना है, तो छोटा बांगड़दा के खसरा नम्बर 116/2/2/1 व अन्य की 1.740 हेक्टेयर एयरपोर्ट सहित सार्वजनिक और अद्र्धसार्वजनिक यानी पीएसपी के अलावा ग्राम कनाडिय़ा की खसरा नम्बर 1220/1, 1220/2 और अन्य रकबे की 6.511 हेक्टेयर खेती की जमीन को आवासीय किया जाना है। जबकि इंदौर का मास्टर प्लान लम्बित पड़ा है, तो उसके प्रारुप को प्रकाशित करने की बजाय भोपाल में बैठे आला अफसर वर्तमान मास्टर प्लान, जो 2021 तक के लिए बना था, उसमें लगातार संशोधन कर हरियाली के साथ-साथ खेती की जमीनों को भी धड़ल्ले से आवासीय करते जा रहे हैं, जबकि मुख्य सचिव अनुराग जैन स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि ना तो धारा 16 में और ना ही धारा 23 (क) के तहत भू-उपयोग परिवर्तन किए जाएं, बल्कि जल्द से जल्द मास्टर प्लान को लाया जाए। सूत्रों का कहना है कि संचालनालय धारा 23 के तहत मचे हल्ले के चलते अब भू-उपांतरण की प्रक्रिया को फिलहाल मंजूरी नहीं देगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved