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इंदौर में अचानक बढ़े खतरनाक वायरल जीबीएस के मरीजों की जांच करने दिल्ली, कोलकाता, भोपाल से अधिकारी इंदौर पहुंचे

January 20, 2026

आखिर अचानक क्यों बढ़ रही है मरीजों की संख्या… एमवाय से लेकर बाम्बे हास्पिटल तक में मरीज भर्ती

इंदौर। एमवाय (MYH) और बॉम्बे हास्पिटल (Bombay Hospital) में भर्ती जीबीएस गुइलेन बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barre syndrome) की गम्भीर बीमारी से पीडि़त मरीजों से सम्बंधित जानकारी जुटाने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र भारत सरकार और प्रदेश सरकार के अधिकारी इंदौर पहुंचे हैं। इनमें दिल्ली, कोलकाता के अलावा भोपाल से राज्य सर्विलांस के अधिकारी शामिल हैं। इस महीने में जीबीएस के सबसे ज्यादा मरीज एमवाय हास्पिटल में भर्ती हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा नीमच जिले के हैं। इनमें 4 से 13 साल तक के बच्चे भी शामिल हैं, जिनका न्यू चेस्ट वार्ड की पीडियाट्रिक यूनिट में इलाज जारी है। अधीक्षक यादव के अनुसार 4 मरीज पीडियाट्रिक यूनिट में और लगभग 6 मरीज एमवाय हास्पिटल में भर्ती हैं। सीएमएचओ डा माधव हसानी के अनुसार 1 मरीज बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती है।


  • सीएमएचओ के अनुसार यह अधिकारी जीबीएस के मरीजो की सारी जानकारी जुटाने कल से इंदौर में हैं। यह एमवाय सहित बॉम्बे हास्पिटल के मरीजों के सम्बंध में यह नीमच भी पहुंचेंगे। इंदौर आए अधिकारियों में दिल्ली एनसीडीसी के डॉक्टर अवधेश कुमार, कोलकाता से डाक्टर नन्दिता दास, डाक्टर गौतम चौधरी और भोपाल से डाक्टर अश्विन भागवत शामिल हैं। इंदौर के सरकारी और निजी अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों में से कुछ स्वस्थ होकर वापस भी जा चुके हैं। एमवाय हॉस्पिटल अधीक्षक डाक्टर अशोक यादव, डाक्टर निर्भय मेहता और सीएमएचओ डा माधव हसानी के अनुसार इनमें ज्यादातर मरीज मनासा नीमच, बैतूल, खण्डवा, धार के अलावा सरदारपुर के हातोद के हैं। मतलब इनमें इंदौर का कोई मरीज नहीं है। सारे मरीज आसपास के जिले से सम्बंधित हैं।

    बहुत महंगा है इलाज… दो दिन में इलाज शुरू न हो तो जान का खतरा
    नसों में मूर्छा के कारण अचानक शारीरिक अंगों में लकवा मारने जैसे लक्षण उभरने लगते है। पैरों से शुरू होकर यह बीमारी जब फेफड़ों तक पहुंचती है तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इससे सम्बन्धित मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होती है, वरना ुसकी मृत्यु तक हो सकती है। इस बीमारी का इलाज भी काफी महंगा है। मरीज का जितना वजन होता है, उतने ग्राम के इंजेक्शन लगते हैं और हर इंजेक्शन की कीमत हजारों रुपयों में होती है।

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