
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के बीच घरेलू ईंधन (Domestic Fuel) की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने घाटे से निपटने का नया रास्ता अपनाया है। अब ओएमसी (OMC) पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और केरोसिन के लिए रिफाइनरियों से रियायती दरों पर ईंधन खरीदेंगी, यानी उन्हें कम भुगतान करना होगा।
सूत्रों के अनुसार, ओएमसी ने 26 मार्च को पेट्रोलियम उत्पादों के लिए ऐसी दरें तय की हैं, जो उनकी आयात लागत से 60 रुपये प्रति लीटर तक कम हैं। यह पहली बार है जब ईंधन की कीमतों के नियंत्रणमुक्त होने के बाद इस तरह का कदम उठाया गया है। ये रियायती दरें 16 मार्च से प्रभावी मानी जाएंगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें
पश्चिम एशिया में संघर्ष से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं। बावजूद इसके, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे होने वाले घाटे को ओएमसी को अपने संसाधनों से झेलना पड़ रहा है।
ईंधन पर रियायती दरों के बाद आरटीपी में कटौती
मार्च के दूसरे पखवाड़े में डीजल पर 22,342 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट दी गई थी, जिससे आरटीपी 85,349 रुपये से घटाकर 63,007 रुपये प्रति किलोलीटर किया गया। अप्रैल के पहले पखवाड़े में डीजल पर छूट 60,239 रुपये प्रति किलोलीटर रखी गई है, जिससे आरटीपी 1,46,243 रुपये से घटकर 86,004 रुपये प्रति किलोलीटर हुआ।
विमान ईंधन पर 50,564 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी 1,27,486 रुपये से घटकर 76,923 रुपये प्रति किलोलीटर हुआ। केरोसिन पर 46,311 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी 1,23,845 रुपये से घटकर 77,534 रुपये प्रति किलोलीटर तय किया गया।
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