
नई दिल्ली । कुमार सानू (Kumar Sanu) का नाम हिंदी फिल्म संगीत (Hindi Film Music) के उन लोकप्रिय गायकों में लिया जाता है, जिनकी आवाज ने 90 के दशक के रोमांटिक गीतों को खास पहचान दी। 23 सितंबर 2026 को उनका 69वां जन्मदिन (Birthday) मनाया जा रहा है। अपनी सुरीली और मखमली आवाज (Velvety voice)के कारण उन्होंने कई फिल्मों के गीतों (Songs)को यादगार बनाया और अलग-अलग पीढ़ियों के श्रोताओं के बीच अपनी जगह कायम की।
कुमार सानू का असली नाम केदारनाथ भट्टाचार्य है। उनका जन्म 20 अक्टूबर 1957 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता पशुपतिनाथ भट्टाचार्य संगीतकार और गायक थे। संगीत की शुरुआती शिक्षा कुमार सानू ने अपने पिता से ही प्राप्त की।
प्लेबैक सिंगिंग में उनकी शुरुआत 1984 में फिल्म ‘ये देश’ से हुई। इसके बाद उनके करियर में महत्वपूर्ण मोड़ 1989 में आया। गजल गायक जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी से कराई। इसी दौरान केदारनाथ भट्टाचार्य को कुमार सानू नाम अपनाने की सलाह मिली।
1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। फिल्म के संगीत को दर्शकों ने खूब पसंद किया और इसके कई गाने बेहद लोकप्रिय हुए। ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’, ‘नजर के सामने’, ‘अब तेरे बिन’ और ‘बस एक सनम चाहिए’ जैसे गीतों ने उनकी रोमांटिक प्लेबैक शैली को मजबूत पहचान दी।
इसके बाद 90 के दशक में कुमार सानू ने कई चर्चित फिल्मों के लिए गीत गाए। ‘बाजीगर’, ‘दीवाना’, ‘साजन’, ‘परदेस’ और ‘1942: ए लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के गीतों में उनकी आवाज सुनाई दी। 1993 में एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड भी उनके करियर से जुड़ा है।
कुमार सानू के लोकप्रिय गीतों में ‘ये काली काली आंखें’ भी शामिल है। ‘बाजीगर’ के इस गीत में उनकी आवाज के साथ अनु मलिक की आवाज भी सुनाई देती है। शाहरुख खान और काजोल पर फिल्माया गया यह गीत आज भी 90 के दशक के लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।
‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें के नहीं’ फिल्म ‘दीवाना’ का चर्चित गीत है। वहीं ‘चुरा के दिल मेरा’ में कुमार सानू और अल्का याग्निक की आवाज सुनाई दी। ‘मेरा दिल भी कितना पागल है’ ने ‘साजन’ के रोमांटिक संगीत को खास पहचान दी।
‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ और ‘लड़की बड़ी अंजानी है’ जैसे गीतों में भी कुमार सानू की आवाज ने श्रोताओं का ध्यान खींचा। ‘हम दिल दे चुके सनम’ का ‘आंखों की गुस्ताखियां’ भी उनकी चर्चित प्रस्तुतियों में शामिल रहा।
कुमार सानू ने बाद के दौर में भी फिल्मों के लिए गीत गाए। 2015 की फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ का ‘दर्द करारा’ उनके नए दौर के लोकप्रिय गीतों में शामिल रहा। इस गीत में उनके साथ साधना सरगम की आवाज सुनाई दी।
संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए कुमार सानू को 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनकी आवाज से जुड़े ये गीत आज भी हिंदी फिल्म संगीत के उस दौर की याद दिलाते हैं, जब रोमांटिक गीतों में उनकी खास पहचान बनी हुई थी।
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