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इधर अमेरिका-ईरान में डील का ऐलान, उधर सरकार का LPG और पेट्रोल को लेकर आ गया बड़ा बयान

June 15, 2026

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की ओर से ईरान के साथ डील का ऐलान करने के बाद पूरी दुनिया इस उम्मीद में बैठी है कि अब एनर्जी का सप्लाई चेन सामान्य होगा. ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है. शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाने हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शांति समझौते का स्वागत किया है. वहीं इस डील के बाद भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है.

LPG, पेट्रोल और डीजल पर भारत का बयान
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, ‘देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की सप्लाई स्थिर बनी हुई है. रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का स्टॉक भी पर्याप्त मात्रा में बनाए रखा जा रहा है. हालांकि, कुछ रिटेल आउटलेट्स पर बिक्री असामान्य रूप से ज्यादा हो रही है. इसका मुख्य कारण यह है कि औद्योगिक, सीधे, संस्थागत और कमर्शियल ग्राहकों द्वारा ईंधन की खरीद अब रिटेल आउटलेट्स से की जा रही है, जिससे वहां बिक्री बढ़ गई है.’

बिना टोल के होर्मुज खोला जाएगा: ट्रंप
ट्रंप अपने एक्स पोस्ट में कहा है कि ईरान के साथ डील हो गयी है जिसके आधार पर बिना टोल के होर्मुज खोला जाएगा. साथ ही ट्रंप ने नौसेना की नाकेबंदी हटाने के आदेश भी जारी कर दिये हैं. अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन लंबे संघर्ष को समाप्त करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलने की उम्मीद है. इस समझौते से पश्चिम एशिया को होने वाले भारत के निर्यात में तेजी आने मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को गति मिलेगी और रुपये को स्थिरता मिलने की संभावना है.


  • खाड़ी देशों से आयात में गिरावट
    इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं और पूरा पश्चिम एशिया व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष के कगार पर आ गया था. यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सैन्य अभियान शुरू किया. इसका असर भारत के निर्यात पर साफ दिखा. मार्च में देश का निर्यात 7.44 फीसदी घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया, जो पांच महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान खाड़ी देशों से आयात भी 51.64 फीसदी गिरा.

    JCC के साथ भारत का कुल व्यापार
    खाड़ी सहयोग परिषद (JCC) के साथ भारत का कुल व्यापार मिला-जुला रुख दिखाता है. 2024-25 में भारत का निर्यात लगभग एक फीसदी बढ़कर 57 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.33 फीसदी बढ़कर 121.7 अरब डॉलर हो गया. संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा. 2025-26 में निर्यात दो फीसदी बढ़कर 37.4 अरब डॉलर और आयात 63.9 अरब डॉलर रहा, जिससे 26.53 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ.

    सऊदी अरब पांचवां सबसे बड़ा साझेदार रहा. निर्यात 12.55 फीसदी घटकर 110.28 अरब डॉलर, जबकि आयात 2.22 फीसदी बढ़कर 30.8 अरब डॉलर और व्यापार घाटा 20.5 अरब डॉलर रहा. कतर को निर्यात 3.7 फीसदी घटकर 1.62 अरब डॉलर और आयात 1.37 फीसदी की गिरावट के साथ 12.3 अरब डॉलर और घाटा 10.7 अरब डॉलर रहा.

    ओमान को निर्यात एक फीसदी घटकर 4.02 अरब डॉलर और आयात 9.43 फीसदी की बढ़त के साथ 7.16 अरब डॉलर और घाटा 3.14 अरब डॉलर रहा. कुवैत को निर्यात 1.65 अरब डॉलर, आयात 7.91 अरब डॉलर और घाटा 6.26 अरब डॉलर रहा. बहरीन को निर्यात 77.9 करोड़ डॉलर, आयात 88.77 करोड़ डॉलर और घाटा 10.87 करोड़ डॉलर रहा.

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