
नई दिल्ली ।महिला समानता दिवस (Women’s Equality Day) के मौके पर मशहूर गायिका और अभिनेत्री इला अरुण (Ila Arun) ने सिनेमा में महिलाओं की स्थिति, अपने लंबे करियर (Long Career) और फेमिनिज्म (Feminism) को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति पहले की तुलना में बदली है, हालांकि देश के अलग-अलग हिस्सों में यह बदलाव एक समान नहीं है। इला अरुण ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि महिलाओं को अपनी बात रखने के साथ जिम्मेदारी और संतुलन (Responsibility And Balance) का भी ध्यान रखना चाहिए।
इला अरुण के करियर में गीत ‘चोली के पीछे क्या है’ को खास पहचान मिली। हालांकि, वह मानती हैं कि इस गीत की लोकप्रियता के साथ उनके ऊपर एक ऐसा ठप्पा भी लगा, जिससे उनके दूसरे काम पीछे छूट गए। उनका कहना है कि लोगों ने उनके कई एल्बम और लोक संगीत से जुड़े कामों को उसी तरह नहीं देखा, जिस तरह इस चर्चित गीत को देखा गया।
उन्होंने कहा कि ऐसे दोहरे अर्थ वाले गीत अलग-अलग क्षेत्रों के लोक संगीत में पहले से मौजूद रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने इसे गाया तो इसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व और करियर की सार्वजनिक छवि पर पड़ा। इला के अनुसार, किसी कलाकार का एक गीत या एक भूमिका उसकी पूरी पहचान तय नहीं कर सकती।
अभिनय के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने पर्दे पर अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। कभी वह मां बनीं, कभी सौतेली मां, कभी मंडी में काम करने वाली महिला और कभी मजबूत महिला का किरदार निभाया। उनके मुताबिक किसी कलाकार द्वारा निभाया गया किरदार उसकी निजी शख्सियत को परिभाषित नहीं करता।
महिलाओं के साथ फिल्म उद्योग में भेदभाव के सवाल पर इला अरुण ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपने काम के दौरान ऐसा भेदभाव बहुत अधिक महसूस नहीं हुआ, क्योंकि वह मुख्य रूप से चरित्र भूमिकाओं से जुड़ी रही हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि पहले महिलाओं को लेकर समाज और फिल्म उद्योग की सोच अलग थी।
इला अरुण ने कहा कि पहले महिलाओं को केंद्र में रखकर कहानियां कम लिखी जाती थीं। उन्हें अक्सर सीमित और पारंपरिक भूमिकाओं तक रखा जाता था। अब महिलाओं पर आधारित और महिला केंद्रित कहानियां अधिक सामने आ रही हैं। उनके अनुसार दर्शकों की पसंद भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि फिल्म उद्योग व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार कहानियां बनाता है।
भारत में महिलाओं की स्थिति पर उन्होंने किसी एक निष्कर्ष से बचते हुए कहा कि देश बहुत बड़ा है और अलग-अलग क्षेत्रों में परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कई पुरानी प्रथाएं अब कमजोर या समाप्त हुई हैं। हालांकि कुछ इलाकों में आज भी लड़कियों की शिक्षा और कम उम्र में विवाह जैसी समस्याएं मौजूद हैं।
फेमिनिज्म पर इला अरुण ने कहा कि इसकी जरूरत है, लेकिन किसी भी अधिकार का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक बराबरी का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति दूसरों के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की सीमा भूल जाए।
उन्होंने महिलाओं से अपने साथ होने वाले गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने की भी अपील की। उनका कहना है कि पेशेवर जीवन में शोषण या अनुचित व्यवहार का सामना करने वाली महिलाओं को डरकर चुप नहीं रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने समाज में पुरुषों के बदलते नजरिए का भी उल्लेख किया और कहा कि आज कई पुरुष परिवार और महिलाओं की जिम्मेदारियों को अधिक संवेदनशीलता से समझ रहे हैं।
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