
इंदौर। जिले की राजस्व अदालतों में नामांतरण, बंटांकन और सीमांकन से जुड़े कुल 75,475 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें से 67,517 प्रकरणों का निराकरण कर दिया गया है, जबकि 7,958 मामले माह के अंत तक लंबित हैं। औसत निराकरण दर 85 से 90 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है। कलेक्टर द्वारा हाल ही में समयसीमा बैठक के दौरान कुछ अधिकारियों पर आर्थिक दंड की कार्रवाई की थी, जिसके बाद असर दिखने लगा है और तेजी से निपटान किया जा रहा है।
इंदौर जिले में अविवादित नामांतरण के 56,391 प्रकरण पंजीकृत हुए, जिनमें से 49,958 का निराकरण किया गया। वही 6,433 मामले लंबित हैं। विवादित नामांतरण के 4,186 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 3,580 का निराकरण हुआ, जबकि 606 प्रकरण अब भी लंबित हैं। हाल ही में उच्च अधिकारियों ने अपने-अपने बोर्ड की समीक्षा की है। संभाग आयुक्त सुदाम खाड़े के दौरे के बाद हाल ही में जारी की गई आईसीएमएस रिपोर्ट के अनुसार नामांतरण के कुल लंबित मामलों में से 3 माह से अधिक समय से लंबित 192 प्रकरण हैं। इनमें 3 से 6 माह के 183 और 6 माह से 1 वर्ष तक के 9 मामले शामिल हैं।
विवादित मामलो पर ज्यादा जोर
सभी तहसलो में अविवादित बंटांकन के 3,115 प्रकरण दर्ज, जिनमें 2,527 का निराकरण किया जा चुका है। अब 588 बाकी हैं। विवादित बंटांकन के 85 प्रकरण दर्ज किए हैं, जिनमें 72 का निराकरण, जबकि 13 मामले शेष हैं। लंबित मामलों पर कलेक्टर नजर रखे हुए हैं। बंटांकन में 3 माह से अधिक समय से 33 प्रकरण लंबित हैं।
मशीन बढ़ी तो गति आई
सीमांकन की हजारों की पेंडेंसी को देखते हुए कलेक्टर द्वारा नई मशीन खरीदी गई थी। उसके बाद बैकलॉग की स्थिति लगभग खत्म होने की कगार पर ही है। सीमांकन के 15,783 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 14,325 का निराकरण कर दिया गया है। हालांकि 1,458 मामले लंबित हैं। इनमें से 3 माह से अधिक समय से 11 प्रकरण ही लंबित हैं। नामांतरण, बंटांकन और सीमांकन के कुल प्रकरणों को मिलाकर जिले में 3 माह से अधिक समय से लंबित कुल 236 प्रकरण ही हैं।
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