नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा (Indian Cinema)में सुपरस्टार (supper star)का दर्जा हासिल करने वाले रजनीकांत (Rajinikanth)की जिंदगी जितनी शानदार दिखाई देती है उसके पीछे संघर्ष और दबाव की एक लंबी कहानी भी है। आज करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1975 में फिल्म अपूर्व रागंगल से की थी। उनका फिल्मी दुनिया से कोई पारिवारिक जुड़ाव नहीं था। उन्होंने अपनी मेहनत और अभिनय के दम पर पहचान बनाई और देखते ही देखते इंडस्ट्री के बड़े सितारों में शामिल हो गए। हालांकि तेजी से मिली सफलता और स्टारडम को संभालना उनके लिए आसान नहीं रहा। एक समय ऐसा भी आया जब काम के अत्यधिक दबाव ने उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया।
करियर के शुरुआती दौर में रजनीकांत ने सफलता हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की। उस समय वह एक साल में 10 से 15 फिल्मों तक में काम कर रहे थे। लगातार शूटिंग और व्यस्त कार्यक्रम के बीच उन्हें आराम करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे और इसके लिए लगातार काम कर रहे थे। लेकिन इतनी कम उम्र में मिली शोहरत और बड़ी जिम्मेदारियों का दबाव धीरे-धीरे बढ़ता गया। एक ओर उनका करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था तो दूसरी ओर उनके लिए इस नई जिंदगी के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल होता जा रहा था।
रजनीकांत ने खुद एक इंटरव्यू में इस दौर के बारे में खुलकर बात की थी। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1988 में इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह स्टारडम का दबाव झेल नहीं पाए थे। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा था कि कुछ साल पहले तक वह बस कंडक्टर के तौर पर 320 रुपये कमाते थे और फिर अचानक एक फिल्म के लिए उन्हें पांच लाख रुपये मिलने लगे। कम समय में जिंदगी में आया यह बड़ा बदलाव उनके लिए आसान नहीं था। पैसा शोहरत और लगातार काम के दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद परेशान कर दिया था।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1981 में मानसिक दबाव के कारण उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस अनुभव ने उन्हें अपनी व्यस्त दिनचर्या और काम करने के तरीके पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने महसूस किया कि सफलता हासिल करने के साथ-साथ अपनी सेहत और निजी जिंदगी पर ध्यान देना भी जरूरी है।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद रजनीकांत ने अपने काम करने के तरीके में बदलाव करना शुरू किया। उन्होंने पहले की तुलना में कम फिल्में करनी शुरू कर दीं ताकि काम का दबाव कम हो सके। इसके साथ ही उनकी निजी जिंदगी में भी बड़ा बदलाव आया। कुछ समय बाद उन्होंने लता रंगाचारी से शादी कर घर बसाया। दोनों की पहली मुलाकात एक इंटरव्यू के दौरान हुई थी। लता अपनी कॉलेज मैगजीन के लिए रजनीकांत का इंटरव्यू लेने पहुंची थीं। यह मुलाकात आगे चलकर रिश्ते में बदल गई।
फिल्मों की संख्या कम करने के बावजूद रजनीकांत की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1980 के आसपास वह एक फिल्म के लिए करीब 25 लाख रुपये तक फीस लेने लगे थे। यह उस समय के लिहाज से बड़ी रकम थी। उनकी कहानी बताती है कि तेजी से मिलने वाली सफलता के साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी बढ़ सकते हैं। रजनीकांत ने अपने अनुभव से काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को समझा और अपनी जिंदगी की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किए।