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पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने धारा 377 हटाई

March 27, 2026

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने एक अहम फैसले में कहा है कि पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंधों (physical relationship between husband and wife) को आईपीसी की धारा 377 के तहत ‘अप्राकृतिक अपराध’ नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की, जिसमें पति ने पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न और दहेज प्रताड़ना के मामले को निरस्त करने की मांग की थी।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मिलिंद फड़के ने 25 मार्च को दिए आदेश में कहा कि धारा 377, जिसे पारंपरिक रूप से ‘अप्राकृतिक कृत्य’ से जोड़ा जाता है, वैवाहिक संबंधों पर लागू नहीं होती। इसलिए पति-पत्नी के बीच के आरोपों पर इस धारा के तहत अभियोजन नहीं चलाया जा सकता।



  • यह मामला एक महिला की शिकायत से जुड़ा था, जिसमें उसने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज में चार लाख रुपये नकद, सोने के आभूषण और घरेलू सामान देने के बावजूद अतिरिक्त छह लाख रुपये और मोटरसाइकिल की मांग का आरोप लगाया था। महिला ने प्रताड़ना, मारपीट और धमकाने के साथ अन्य अनुचित आचरण के आरोप भी लगाए थे।

    इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने धारा 377, 498-ए, 354 सहित अन्य धाराओं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। पति की ओर से दलील दी गई कि आरोप पूर्व बयानों से मेल नहीं खाते और पति-पत्नी के बीच के कथित कृत्यों पर धारा 377 लागू नहीं होती।

    हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ धारा 377 के तहत दर्ज आरोप निरस्त कर दिए। हालांकि अदालत ने पति, सास और ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और मारपीट से जुड़े आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए उन्हें रद्द करने से इनकार कर दिया।

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