img-fluid

आवारा कुत्ते पर छिड़ी ‘जंग’! मेक्सिको-ब्राजील में कारोमेलो नस्ल को लेकर बढ़ा विवाद

June 05, 2026

नई दिल्ली। आमतौर पर देशों के बीच सीमा, व्यापार या सांस्कृतिक विरासत को लेकर विवाद देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मामला एक आवारा कुत्ते (Stray dogs) की नस्ल को लेकर गर्मा गया है। लैटिन अमेरिका (USA) के दो बड़े देश मेक्सिको और ब्राजील के बीच ‘कारोमेलो’ नामक लोकप्रिय देसी कुत्ते की नस्ल को लेकर तनातनी बढ़ती दिख रही है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब अप्रैल में मेक्सिको ने कारोमेलो कुत्ते को अपनी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों से जोड़ते हुए मान्यता दी। इस फैसले के बाद ब्राजील में नाराजगी फैल गई, क्योंकि वहां लंबे समय से इस नस्ल को स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्राजील में लोगों ने सोशल मीडिया पर विरोध जताया और सरकार से इस नस्ल को राष्ट्रीय धरोहर के तौर पर सुरक्षित करने की मांग की।


  • ब्राजील में क्यों खास है कारोमेलो?

    कारोमेलो कुत्ते अपनी हल्की भूरी रंगत, फुर्तीले शरीर और अनुकूल स्वभाव के कारण ब्राजील और मेक्सिको दोनों जगह बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। हालांकि, ब्राजील में इनकी लोकप्रियता 2019 के बाद तेजी से बढ़ी, जब सोशल मीडिया पर इनके वीडियो वायरल होने लगे। इसके बाद यह नस्ल देश की पॉप कल्चर का हिस्सा बन गई।

    ब्राजील में इस कुत्ते को लेकर लोगों का लगाव इतना बढ़ा कि 10 रियाश के नोट पर इसकी तस्वीर छापने की मांग तक उठी। इसके समर्थन में ऑनलाइन अभियान चलाया गया, जिसे हजारों लोगों का समर्थन मिला। धीरे-धीरे कारोमेलो को ब्राजील के सामाजिक बदलाव और ऐतिहासिक पहचान से भी जोड़ा जाने लगा। यहां तक कि इस नस्ल पर आधारित एक फिल्म भी बनाई गई।

    मेक्सिको का क्या कहना है?

    ब्राजील की नाराजगी के बाद मेक्सिको की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। पशु अधिकार संगठन से जुड़ी विशेषज्ञ क्लाउडिया एडवर्ड्स ने कहा कि ब्राजील ने इस कुत्ते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय जरूर बनाया, लेकिन इसे सिर्फ एक देश की विरासत नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, कारोमेलो पूरी लैटिन अमेरिकी संस्कृति का हिस्सा है।

    क्या है कारोमेलो की असली कहानी?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, कारोमेलो किसी एक शुद्ध नस्ल का कुत्ता नहीं बल्कि सदियों में विकसित हुआ मिश्रित वंश का परिणाम है। माना जाता है कि यूरोपीय उपनिवेशवाद के दौरान विभिन्न देशों से लाए गए कुत्तों के आपसी प्रजनन से यह नस्ल विकसित हुई। समय के साथ ये कुत्ते खेतों, घरों और स्थानीय समुदायों का हिस्सा बन गए।

    दिलचस्प बात यह है कि जिस कुत्ते को लेकर दो देश सांस्कृतिक दावा कर रहे हैं, वह आज भी दोनों देशों की सड़कों पर बड़ी संख्या में बेसहारा घूमता दिखाई देता है।

    Share:

  • ‘जय भीम’ के नारे के साथ भारत लौटे अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर समर्थकों में उत्साह

    Fri Jun 5 , 2026
    नई दिल्ली । सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी से लोकप्रिय हुई कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) अब डिजिटल मंचों (Digital Platforms) से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) ने अमेरिका (United States) से भारत के लिए रवाना […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved