
नई दिल्ली। अगर आप भी फ्लाइट (Flights) से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत ने फ्लाइट (Flights) में पावर बैंक (Power Bank) और लिथियम बैटरी वाली डिवाइसेस (Lithium batteries Devices) को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। डीजीसीए ने फ्लाइट के दौरान फोन या अन्य चीजों को चार्ज करने वाले पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। दुनियाभर में पावर बैंक से आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।
डीजीसीए ने इसको लेकर पिछले साल नवंबर में एक एडइवाजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी सिर्फ हैंड लगेज में ले जाने की इजाजत होगी। उसे ओवरहेड कपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं। इसके पीछे आग लगने की वजह बताई गई थी और कहा गया था कि आग लगने पर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
लिथियम बैटरी से आग बहुत तेजी से पकड़ती है, क्योंकि इस बैटरी में एनर्जी बहुत अधिक होती है। इस आग को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है। एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरक्राफ्ट के केबिन के अंदर छोटी सी बैटरी में लगी आग भी तेजी से फैल सकती है, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है।
डीजीसीए के सर्कुलर में कहा गया है, “अलग-अलग रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से हवाई जहाज से लिथियम बैटरी ले जाने में बढ़ोतरी हुई है। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और लिथियम बैटरी वाले ऐसे ही डिवाइस आग लगने का कारण बन सकते हैं और जहाज में आग लगा सकते हैं।” आगे कहा गया है, “ओवरहेड स्टोरेज डिब्बे में या कैरी-ऑन बैगेज के अंदर रखी लिथियम बैटरी छिपी हो सकती हैं, उन तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, या यात्री या क्रू मेंबर उन पर आसानी से नजर नहीं रख सकते। इससे धुआं या आग लगने का पता चलने और उस पर कार्रवाई करने में देरी हो सकती है, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है।”
मौजूदा एविएशन सेफ्टी गाइडलाइंस के अनुसार, पावर बैंक सिर्फ केबिन बैगेज में ले जाने की इजाजत है, चेक-इन लगेज में नहीं। हालांकि, यात्रियों को फ्लाइट के दौरान पावर बैंक से डिवाइस चार्ज करने की इजाजत नहीं है। एयरलाइंस ने अब यात्रियों को इस पाबंदी के बारे में बताने के लिए बोर्डिंग अनाउंसमेंट और इनफ्लाइट ब्रीफिंग के जरिए याद दिलाना शुरू कर दिया है।

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