
नई दिल्ली। हिंदू धर्म (Hindu Religion) में भगवान शिव और माता पार्वती Lord Shiva and Mother Parvati() को समर्पित प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का खास महत्व है। यह व्रत हर महीने दो बार त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, लेकिन साल 2026 के मार्च महीने में यह महीने और भी विशेष बन गया है क्योंकि इस बार 3 प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। इन व्रतों को करने से जीवन में सुख, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है।
पहला प्रदोष व्रत – रवि प्रदोष
मार्च का पहला प्रदोष व्रत फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह तिथि 28 फरवरी की रात 08:43 बजे से शुरू होकर अगले दिन 1 मार्च की सुबह 09:11 बजे समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए यह व्रत 1 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा। शाम का प्रदोष काल मुहूर्त शाम 06:21 बजे से 07:08 बजे तक रहेगा।
दूसरा प्रदोष व्रत – सोम प्रदोष
मार्च का दूसरा प्रदोष व्रत चैत्र माह की कृष्ण त्रयोदशी को रखा जाएगा। यह तिथि 16 मार्च की सुबह 09:41 बजे से 17 मार्च की सुबह 09:24 बजे तक रहेगी। इस बार यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा और यह दोगुना फल देने वाला माना गया है। इस दिन पूजा का समय शाम 06:31 बजे से रात 08:54 बजे तक रहेगा।
तीसरा प्रदोष व्रत – सोम प्रदोष
मार्च का तीसरा प्रदोष व्रत चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह तिथि 30 मार्च की सुबह 07:08 बजे से 31 मार्च की सुबह 06:56 बजे तक रहेगी। इसलिए प्रदोष व्रत 30 मार्च 2026, सोमवार को होगा। शाम का प्रदोष काल मुहूर्त 06:38 बजे से 08:57 बजे तक निर्धारित है।
इस महीने तीन बार प्रदोष व्रत रखने का अवसर मिलने से भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त करने का सुनहरा मौका मिलेगा। व्रत के दौरान शाम के प्रदोष काल में पूजा, ध्यान और नियमपूर्वक उपासना करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव, सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति आती है।
(Disclaimer: यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है और हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।)
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