
हरिद्वार। हरिद्वार (Haridwar) में 2027 को कुंभ मेले (Kumbh Mela) का आयोजन किया जाना है। इसे लेकर शासन और प्रशासन स्तर पर लगातार कार्य किए जा रहे हैं। तैयारियों को लेकर 29 जून के दिन हरिद्वार में एक अहम बैठक बुलाई गई थी, लेकिन जूना (Juna), निरंजनी (Niranjani) समेत पांच प्रमुख संन्यासी अखाड़ों ने बैठक का बहिष्कार किया।
बहिष्कार के पीछे कारण जो भी रहे हो लेकिन अखाड़ा परिषद की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। बैठक में आठ अखाड़ों के संत ही शामिल हुए। बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद ही एक फोन आने पर आह्वान अखाड़े के महामंत्री महंत सत्य गिरी महाराज भी सभागार से बाहर निकल गए।
सिर्फ आठ अखाड़ों के संत ही शामिल हुए
शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा की अध्यक्षता में बैठक मेला नियंत्रण भवन में बुलाई गई थी। दोपहर तीन बजे शुरू हुई बैठक में महानिर्वाणी, निर्मोही, निर्वाणी, पंच दिगंबर, निर्मल, नया उदासीन, बड़ा उदासीन और अटल अखाड़े के संत शामिल हुए। यही आठ अखाड़े दो दिन पहले कनखल में बैठक कर अखाड़ा परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन कर चुके हैं, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज को अध्यक्ष और निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज को महामंत्री घोषित किया गया था। दूसरी ओर जूना, निरंजनी, अग्नि, आह्वान और आनंद अखाड़ों के प्रतिनिधि बैठक से दूर रहे। अखाड़े के दूसरे गुट में संन्यासी अखाड़े शामिल है। निरंजनी अखाड़ें के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी इस गुट के अध्यक्ष है। गुटों में बटे अखाड़ों में रार बढ़ती जा रही है।
संतों का प्रशासन पर पक्षपात करने का आरोप
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहा है। उनका कहना था कि जब बैठक का समय दोपहर तीन बजे निर्धारित था तो अधिकारियों को दूसरे गुट के भंडारे में नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने नई अखाड़ा परिषद के गठन को फर्जी बताते हुए दावा किया कि जूना और निरंजनी सबसे बड़े संन्यासी अखाड़े हैं और उन्हें 13 अखाड़ों में बहुमत के साथ किन्नर, वाल्मीकि और रविदास अखाड़ों का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में दिव्य और भव्य कुंभ चाहते हैं, लेकिन कुछ अधिकारी माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने मेलाधिकारी सोनिका की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वह मेले को सफल बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही हैं।
संतों का क्या कहना है
अखाड़ा परिषद के अक्ष्यक्ष और महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि बैठक में कुंभ मेले की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैरागी अखाड़ों के लिए भूमि आवंटन की प्रमुख मांग सरकार के समक्ष रखी गई है। साधु-संतों में किसी प्रकार की नाराजगी नहीं है और सभी अखाड़े एक हैं। अगली बैठक में सभी अखाड़ों के संत शामिल होंगे और कुंभ का दिव्य एवं भव्य आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
आह्वान अखाड़े के महामंत्री महंत सत्य गिरी महाराज ने कहा कि वर्तमान में कोई वैध अखाड़ा परिषद अस्तित्व में नहीं है। 13 अखाड़े मिलकर ही अध्यक्ष, महामंत्री और पूरी कार्यकारिणी का चुनाव करते हैं। कुंभ में जूना, अग्नि और आह्वान अखाड़ा एक साथ शाही स्नान करते हैं । जब जूना और अग्नि अखाड़े का कोई प्रतिनिधि बैठक में नहीं आया तो उन्होंने भी बैठक में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया।
निर्मोही अखाड़े की तरफ से श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि आठ अखाड़ों की सहमति से अखाड़ा परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। जबकि सभी आठ अखाड़ों के प्रतिनिधि कुंभ की बैठक में मौजूद रहे। विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हरिद्वार कुंभ 2027 का सफल और ऐतिहासिक आयोजन होगा।
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