
चंडीगढ़ । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) ने हरियाणा राज्य के गठन के 60 वर्ष पूरे होने पर (On completion of 60 years of formation of state of Haryana) प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं (Extended Best Wishes to the People of the State) ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एक नवंबर को कुरुक्षेत्र में हरियाणा राज्य के गठन के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हीरक जयंती’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं । इसके साथ ही वे गुरुकुल कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित वार्षिक समारोह में भी शामिल हुईं । भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार देर सायं हरियाणा पहुंचीं। अंबाला एयरबेस पर पहुंचने पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पुष्पगुच्छ भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत एवं अभिनंदन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हरियाणा आगमन को लेकर प्रदेश में विशेष उत्साह है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति की जीवन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ओडिशा के मयूरभंज जिले के छोटे से गांव उपरबेड़ा से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और संविधान की गरिमा का प्रतीक है। उनकी यह प्रेरणादायी यात्रा देश की प्रत्येक बेटी, गरीब परिवार और आदिवासी समाज के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा है।

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने हरियाणा के गठन के 60 वर्ष पूरे होने पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छह दशकों की यह यात्रा केवल एक नए राज्य के निर्माण और विकास की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, श्रम, आत्मसम्मान, कर्तव्यनिष्ठा और सामूहिक संकल्प की ऐसी गाथा है, जिसने प्रदेश को राष्ट्रीय पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। हरियाणा की असली ताकत यहां की मिट्टी से जुड़े वे जीवन मूल्य हैं, जो किसान के परिश्रम, सैनिक के साहस और खिलाड़ी के अनुशासन में दिखाई देते हैं। राज्यपाल रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं तथा समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की।
प्रो. असीम कुमार घोष ने हरियाणा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी पावन भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। गीता में निहित निष्काम कर्म, कर्तव्य और धर्म का संदेश आज भी मानव जीवन को दिशा देने की क्षमता रखता है। हरियाणा के सामाजिक चरित्र में भी इसी कर्मप्रधान दर्शन की झलक दिखाई देती है। यहां का किसान बिना थके खेतों में परिश्रम करता है, सैनिक निस्वार्थ भाव से राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा करता है और खिलाड़ी अपने अनुशासन एवं समर्पण से देश का गौरव बढ़ाता है। ये सभी हरियाणा की उस जीवंत परंपरा के प्रतीक हैं, जिसमें कर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने कृषि प्रधान राज्य के रूप में भारत की हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज यह राज्य कृषि, उद्योग, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और खेल के क्षेत्र में अग्रणी है। गुरुग्राम की गगनचुंबी इमारतों से लेकर गांवों के अखाड़ों तक, हरियाणा ने यह साबित किया है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा ने अपने गठन के 60 वर्षों में प्रगति का लंबा सफर तय किया है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने हरियाणा को देश का पहला विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है, इसी ध्येय के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो असीम कुमार घोष की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का गीता की पावन धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना प्रदेशवासियों के लिए गर्व और गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। इसी पावन भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के माध्यम से कर्तव्य, साहस और लोक कल्याण का दिव्य संदेश दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति की वर्ष 2022 में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर कुरुक्षेत्र यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उस समय राष्ट्रपति ने गीता को मानवता के लिए आध्यात्मिक प्रकाश और जीवन को दिशा देने वाला महान ग्रंथ बताया था। आज उनकी पुनः उपस्थिति इस पावन भूमि के लिए विशेष गौरव का अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा का गठन हुआ था। उस समय प्रदेश को पिछड़े क्षेत्र के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज हरियाणा देश के अग्रणी और तेजी से विकास करने वाले राज्यों में शामिल है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों, मजदूरों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, खिलाड़ियों और माताओं-बहनों के अथक परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की पहचान मेहनती किसान, बहादुर जवान, धाकड़ खिलाड़ी और सशक्त नारी से है। प्रदेश की बेटियां आज खेतों से लेकर खेल के मैदानों तक, सेना से लेकर स्टार्टअप तक प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के किसानों ने देश के अन्न भंडार भरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वहीं, पशुपालकों ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर ‘देशां में देश हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा’ की कहावत को सार्थक किया है। प्रदेश के जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए हमेशा अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि खेलों के क्षेत्र में भी हरियाणा ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 11 पदक और एशियाई खेलों में 32 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊंचा लहराता है, उसमें हरियाणा की मिट्टी की मेहनत और प्रतिभा की महक होती है।
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