
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा से (Prime Minister Narendra Modi’s visit to Kyrgyzstan) द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी (Will strengthen Bilateral Relations) ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय विदेश यात्रा के लिए शनिवार को रवाना हो गए। पीएम मोदी 29 अगस्त से एक सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौर पर रहेंगे। इस यात्रा को भारत के लिए मध्य एशिया के साथ रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को नई गति देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। किर्गिस्तान में भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह प्रधानमंत्री मोदी की किर्गिस्तान की तीसरी यात्रा होगी।
बीरेंद्र सिंह ने बताया, “पीएम मोदी पहले 2015 की आधिकारिक यात्रा पर, दूसरी बार 2019 में एससीओ समिट में भाग लेने आए थे। अब किर्गिस्तान में फिर एससीओ सम्मेलन का आयोजन हो रहा है तो वो 26वीं बैठक में हिस्सा लेने आ रहे हैं।” भारत के राजदूत ने आगे कहा, “एससीओ समिट से इतर प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता भारत-किर्गिस्तान संबंधों की व्यापक समीक्षा करने के साथ ही सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान पर भी विचार-विमर्श करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना भी बातचीत का अहम हिस्सा होगा। प्रधानमंत्री मोदी की पिछली यात्रा के बाद पिछले पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो गया है, लेकिन अभी भी हमारे ट्रेड टर्नओवर का जो स्तर है वो क्षमता अनुरूप नहीं है। प्रयास यही रहेगा कि पीएम के मार्गदर्शन में हम आगे बढ़ें। भारत और किर्गिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाएं काफी व्यापक हैं और दोनों पक्ष व्यापार को बढ़ाने तथा आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।”
बीरेंद्र सिंह के मुताबिक, पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2019 में रक्षा सहयोग पर डिफेंस पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) गठित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह संयुक्त कार्य समूह नियमित रूप से बैठक करता है और दोनों देशों के प्रतिनिधि रक्षा सहयोग के लिए वार्षिक कार्ययोजना तैयार करते हैं। वहीं रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को लेकर उन्होंने कहा, “भारत और किर्गिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खंजर’ भी नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह अभ्यास भारत के मीसामारी में हुआ, जबकि अगला अभ्यास फरवरी में किर्गिस्तान में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, भारत रक्षा क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए किर्गिस्तान को प्रशिक्षण और विशेष रूप से तैयार किए गए पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराता है।” बीरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक, “भारत-किर्गिस्तान संबंधों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दोनों देशों की क्षमताओं को मजबूत करना है, ताकि आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ जैसी साझा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।”
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