
इंदौर। नशीले पदार्थों के खिलाफ केन्द्र सरकार ने जंग शुरू की है और केन्द्रीय गृहमंत्री द्वारा बुलाई बैठक के बाद यह तय किया गया कि 1 अप्रैल 2026 से अगले तीन वर्षों तक ड्रग फ्री इंडिया के लक्ष्य की प्राप्ति की जाएगी, जिसमें मध्यप्रदेश में भी ड्रग माफिया का नेटवर्क ध्वस्त होगा। इसके चलते इंदौर सहित कई जिलों में हॉटस्पॉट चिन्हित कर लिए हैं, जहां पर ड्रग का कारोबार फैला है। वहीं नारकोटिक्स विंग ने पिछले एक साल में 4 हजार से अधिक प्रकरण दर्ज किए और 347 करोड़ रुपए के नशीले पदार्थों को नष्ट करते हुए 300 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्तियां ड्रग तस्करों की कुर्क की गई।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने एक उच्च स्तरीय बैठक में अवैध मादक पदार्थों की समस्या को समूल नष्ट करने की रूप रेखा पर चर्चा की और महकमे को निर्देश दिए कि मादक पदार्थों के मामले में हरसंभव कठोर कार्रवाई की जाए। इसके लिए पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस बैठक में रीतेश रंजन झोनल डायरेक्टर नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो इंदौर के साथ निखिल गांधी डिप्टी कमिश्रर, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नार्कोटिक्स सहित ड्रग कंट्रोलर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
नार्कोटिक्स विंग ने अपनी 2025 की कार्रवाई का ब्योरा भी दिया, जिसमें बताया गया कि एनडीपीसी एक्ट के तहत 4116 प्रकरणों में 5275 आरोपी नशीले पदार्थों की तस्करी में गिरफ्तार हुए, जिनसे 64615 किलो मादक पदार्थ, जिनमें स्मैक, अफीम, गांजा, चरस, डोडाचूरा प्रमुख रहे। इंदौर में एक अफ्रीकी युवती से कुछ दिनों पूर्व 31 ग्राम कोकीन, जिसका मूल्य साढ़े 15 लाख रुपए बताया गया, बरामद की गई थी। वहीं सालभर में जो 1 लाख 44 हजार किलो जब्तशुदा मादक पदार्थ पकड़े, उनको नष्ट भी करवाया, जिसका बाजार मूल्य 347 करोड़ रुपए आंका गया। वहीं ड्रग तस्करों की आर्थिक कमर तोडऩे के लिए 54 कार्रवाइयों में 301 करोड़ रुपए की सम्पत्ति सफेमा एक्ट के तहत कुर्क की गई। आदतन अपराधियों के खिलाफ इंदौर, रतलाम, नीमच जिलों में प्रभावी कार्रवाई की गई और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े प्रदेश के 33153 अपराधियों का डाटा निदान पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया, ताकि उनकी हर गतिविधि पर पैनी निगाह रखी जा सके। इंदौर सहित कुछ अन्य जिलों को हॉटस्पॉट माना गया है।
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