
इन्दौर। भाजपा का प्रदेश में बूथ विस्तारक और त्रिदेव के नाम से शुरू किया गया प्रयोग पहले ही चुनाव में फेल नजर आया। इस प्रयोग का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया था और बूथ लेवल तक ट्रेनिंग प्रोग्राम रखे गए थे, लेकिन जिस तरह से मतदाता सूची में गड़बडिय़ां सामने आईं, उसने इस अभियान की पोल खोलकर रख दी।
भाजपा ने इस साल की शुरुआत में समर्पण निधि अभियान के साथ-साथ बूथ विस्तारक अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत एक-एक वरिष्ठ नेता को बूथ विस्तारक बनाकर बूथ पर भेजा गया था, जहां उसे बूथ की समितियां बनाना थीं और उसे ऑनलाइन पोर्टल पर लोड करना था। बूथ समिति का उद्देश्य उस बूथ के अंतर्गत रहने वाले मतदाताओं की जानकारी रखना था और उनसे लगातार संपर्क में रहना था।
उस समय दावे तो खूब किए गए कि अभियान सफल हो गया है। इसके लिए नेताओं ने अपनी पीठ भी थपथपाई। इसके बाद हर बूथ पर त्रिदेव के रूप में अध्यक्ष, महामंत्री और भाजपा की ओर से बीएलए बनाया गया। बूथ पर 20 लोगों की समिति भी तैयार हो गई, जिनका काम ही मतदाता सूची की जांच करना था और मतदाताओं को भाजपा से जोडऩा था, लेकिन इसका परिणाम उलटा हुआ और कई लोगों के नाम सूची से कट गए, जिसकी भनक भाजपा तक को लग नहीं पाई। अब भाजपा इसकी समीक्षा करने की बात कह रही है। समीक्षा के दौरान पदाधिकारियों से सवाल भी किए जाएंगे कि गड़बड़ी आखिर कहां हुई?
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