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परिवहन विभाग के फेसलेस ऑटो अप्रूवल सिस्टम पर उठे सवाल

October 08, 2026

उज्जैन। परिवहन मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश सहित देश के अधिकांश राज्यों में वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए शुरू किया गया फेसलेस ऑटो अप्रूवल सिस्टम पहले ही महीने में सवालों के घेरे में आ गया है। व्यवस्था लागू होने के करीब एक माह में प्रदेश में करीब 8 हजार और उज्जैन इंदौर में करीब ढ़ाई हजार वाहनों का ट्रांसफर बिना परिवहन अधिकारी की दस्तावेज जांच के हो चुका है।



  • अब विभाग इन ऑटो अप्रूव हुए मामलों की जाँच कर रहा है तो करीब आधे मामलों में दस्तावेज अधूरे या गलत पाए जा रहे हैं। कई मामलों में तो वाहन ट्रांसफर के लिए सबसे जरूरी फॉर्म 29 और 30 की जगह कोरे कागज तक अपलोड किए गए और सिस्टम ने इन्हें स्वीकार कर वाहन ट्रांसफर कर दिया। यही नहीं, जिन वाहनों पर टैक्स-पेनल्टी बकाया थी या जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज थी, उनका भी ऑटो अप्रूवल के जरिए ट्रांसफर होने के मामले सामने आए हैं। मामले में परिवहन अधिकारियों का कहना है कि विभाग ऑटो अप्रूवल के खिलाफ नहीं है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में जरूरी वैधानिक और तकनीकी जांच पूरी तरह खत्म हो गई है। इससे न केवल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहन ट्रांसफर होने का खतरा है, बल्कि शासन को टैक्स और पेनल्टी के रूप में मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो सकता है। अधिकारियों ने शासन और एनआईसी को सुझाव दिया है कि ऑटो अप्रूवल में तत्काल ट्रांसफर करने के बजाय कम से कम 7 दिन की अवधि रखी जाए। इस दौरान अधिकारी दस्तावेजों की जांच करें। सब कुछ सही मिलने पर ट्रांसफर अप्रूव किया जाए और कमी मिलने पर आवेदन सुधार के के लिए वापस भेजा जाए। यदि 7 दिन में अधिकारी जांच नहीं करते हैं तो तय अवधि के बाद वाहन अपने आप ट्रांसफर हो जाए। इससे एक तरफ अधिकारी की जांच भी बनी रहेगी और दूसरी तरफ फाइलों को कार्यालय में अनावश्यक रूप से रोकने की शिकायत भी खत्म हो सकेगी।

    जाँच में सामने आ रही ये गड़बडिय़ाँ
    ऑटो अप्रूवल से ट्रांसफर हुए वाहनों की अब विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जांच में बड़ी संख्या में ऐसे मामले मिल रहे हैं, जिनमें जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए हैं। सबसे गंभीर स्थिति फॉर्म 29 और 30 को लेकर सामने आई है। वाहन की खरीदी-बिक्री के लिए विक्रेता और खरीदार के बीच इन फॉर्म का होना जरूरी है, लेकिन कई मामलों में इनके स्थान पर खाली कागज अपलोड कर दिए गए। सिस्टम ने दस्तावेज की सामग्री की जांच किए बिना आवेदन को ऑटो अप्रूव कर दिया। इसी तरह कुछ मामलों में वाहन पर टैक्स और पेनल्टी बकाया होने के बावजूद ट्रांसफर हो गया। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे मामलों में पहले मैन्युअल जांच के दौरान बकाया राशि की वसूली की जाती थी। कुछ ऐसे वाहन भी सामने आए हैं, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज थी, लेकिन इसके बावजूद उनका ट्रांसफर ऑटो अप्रूवल के जरिए हो गया।

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