
नई दिल्ली । सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी ने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी हैं और इसी वजह से जब दोनों लंबे समय बाद एक साथ फिल्म बंटवारा 1947 लेकर आए तो दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं। फिल्म में सनी देओल पहली बार एक अलग तरह के किरदार में नजर आए हैं। उन्होंने मुस्लिम शख्स सिकंदर मिर्जा की भूमिका निभाई है जो कहानी के दौरान कट्टरपंथ के खिलाफ खड़ा होता है। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उस स्तर की सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके बाद यह सवाल भी उठने लगा कि क्या सनी देओल को मुस्लिम किरदार में पेश करना फिल्म की दर्शक अपील पर भारी पड़ा। अब निर्देशक राजकुमार संतोषी ने इस सवाल पर खुलकर अपनी बात रखी है।
राजकुमार संतोषी के मुताबिक फिल्म की कास्टिंग करते समय इस पहलू पर विचार जरूर किया गया था लेकिन सनी देओल को मुस्लिम किरदार में लेने का फैसला किसी मजबूरी के तहत नहीं बल्कि पूरी तरह रचनात्मक सोच के साथ किया गया था। उनका मानना था कि सनी इस भूमिका को बेहद प्रभावी तरीके से निभा सकते हैं। निर्देशक ने बताया कि सिकंदर मिर्जा का किरदार सिर्फ एक धर्म विशेष की पहचान तक सीमित नहीं है बल्कि वह कहानी में एक महत्वपूर्ण विचार और संघर्ष को सामने रखता है। किरदार कट्टरपंथ का विरोध करता है और दुश्मन के इलाके में जाकर लड़ाई लड़ने वाला व्यक्ति है। यही वजह थी कि संतोषी इस भूमिका में सनी देओल की छवि और उनकी अभिनय क्षमता का अलग इस्तेमाल करना चाहते थे।
निर्देशक ने यह भी बताया कि सनी देओल के साथ उनकी पुरानी दोस्ती और पेशेवर रिश्ते ने इस कास्टिंग को आसान बनाया। दोनों की जोड़ी पहले घायल दामिनी और घातक जैसी सफल फिल्मों में दर्शकों का मनोरंजन कर चुकी है। संतोषी का कहना है कि सनी एक बेहद प्रभावशाली अभिनेता हैं और वह किसी भी किरदार को अपनी शैली में विश्वसनीय बनाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए सिकंदर मिर्जा की भूमिका के लिए उन्हें चुनना एक सोचा समझा फैसला था।
राजकुमार संतोषी ने यह भी खुलासा किया कि वह और सनी देओल काफी समय से दोबारा साथ काम करने की योजना बना रहे थे। करीब 2008 में भी दोनों ने एक फिल्म पर साथ काम करने की योजना बनाई थी। संतोषी ने बताया कि जब उन्होंने उस समय अपनी कहानी सनी को सुनाई थी तो अभिनेता को भी विषय पसंद आया था। निर्देशक उस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर की मुख्यधारा की फिल्म बनाना चाहते थे और उनका मानना था कि सनी देओल की लोकप्रियता के जरिए कहानी ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंच सकती है। इसी सोच का असर बाद में बंटवारा 1947 की कास्टिंग में भी दिखाई दिया।
फिल्म की कहानी बंटवारे के दौर की पृष्ठभूमि से जुड़ी है और इसमें उस समय के सामाजिक तथा मानवीय संघर्षों को सामने लाने की कोशिश की गई है। सनी देओल का किरदार इसी माहौल में अलग नजरिया पेश करता है। हालांकि सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ने भारत में करीब 33.60 करोड़ रुपये और दुनियाभर में लगभग 47.62 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इसके बाद फिल्म की कमाई और इसकी कास्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई।
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हालांकि राजकुमार संतोषी ने साफ कर दिया है कि सनी देओल को मुस्लिम किरदार देना फिल्म की कमजोरी नहीं बल्कि उनकी रचनात्मक पसंद थी। उनके अनुसार सनी के लिए भी यह भूमिका एक अलग अभिनय चुनौती थी और अभिनेता इस किरदार को लेकर काफी उत्साहित थे। ऐसे में फिल्म की कमाई कम रहने के बावजूद निर्देशक अपनी कास्टिंग के फैसले को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं।
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