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रिटायर्ड IPS प्रकाशसिंह का बड़ा खुलासा, कांग्रेस शासन में RSS की निगरानी करती थी IB

January 22, 2026

नई दिल्ली.  कांग्रेस के शासनकाल में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखती थी. यह दावा रिटायर्ड IPS अधिकारी और पद्मश्री से सम्मानित प्रकाश सिंह (Prakash Singh) ने आजतक रेडियो के कार्यक्रम क्राइम ब्रांच में किया है.

उनके मुताबिक, उस दौर में इन संगठनों को सरकार सांप्रदायिक प्रवृत्ति का मानती थी. इसी वजह से IB को इनकी गतिविधियों की बारीकी से निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने बताया कि खुफिया एजेंसी के एजेंट कई मामलों में उन संगठनों के भीतर काडर बनकर भी दाखिल हो जाते थे.


  • उन्होंने कहा कि IB की कार्यशैली ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित थी. एजेंसी के लोग कभी सीधे संगठन का हिस्सा बनकर तो कभी उससे जुड़े लोगों से दोस्ती कर अहम जानकारियां जुटाते थे. मुखबिरों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाता था, जो संवेदनशील इलाकों और संगठनों से इनपुट देते थे.

    प्रकाश सिंह ने बताया कि समय के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपनी रणनीतियों में बदलाव भी किया है. इनफिल्ट्रेशन के साथ-साथ सोशल नेटवर्किंग और संपर्कों के जरिए सूचनाएं इकट्ठा करने के तरीके अपनाए गए है. नए दौर में तकनीकी टेक्निकल इंटेलिजेंस का दायरा भी तेजी से बढ़ा.

    संचार माध्यमों की निगरानी, डिजिटल गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण और तकनीक का सपोर्ट सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल IB की कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा बन गया. एजेंसी का मुख्य उद्देश्य किसी घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उससे पहले चेतावनी देना होता है.

    आतंकी खतरे, सांप्रदायिक तनाव और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इनपुट समय रहते राज्य और केंद्र सरकार को भेजे जाते हैं. इस कार्यक्रम के दौरान प्रकाश सिंह ने अपने सेवा काल से जुड़ा एक अहम अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम कसने की बात बताई.

    इसके लिए भारत-पाक सीमा पर कंटीले तार लगवाने की पहल की गई थी, जिससे घुसपैठ की घटनाओं में बड़ी कमी आई. इसी योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था. प्रकाश सिंह 1959 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं. वे सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक रह चुके हैं.

    असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने का उनका अनुभव देश में पुलिस सुधारों की दिशा में बेहद अहम माना जाता है. उन्होंने उन्होंने छह किताबें भी लिखी हैं. इसमें ‘इंडियाज नॉर्थईस्ट: द फ्रंटियर इन फर्मेंट’ प्रमुख है.

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