
जबलपुर। यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने वाली 114 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। परियोजना के तीसरे चरण के अंतर्गत हीरापुर बंधा गांव के समीप निर्माणाधीन रोड ओवर ब्रिज का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा इस खंड पर रेल लाइन के ऊपर गर्डर रखने का कार्य बीते दिनों पूरा किया गया, जिससे अब रिंग रोड के इस हिस्से में वाहनों की आवाजाही का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। यह पूरा पैकेज जून 2026 तक जनता के लिए समर्पित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
क्या खास है इस आरओबी में
हीरापुर बंधा के पास निर्मित यह रोड ओवर ब्रिज इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी कुल लंबाई 1 किलोमीटर है, जबकि रेल लाइन के ठीक ऊपर से गुजरने वाले मुख्य हिस्से की लंबाई 76 मीटर मापी गई है। परियोजना निदेशक अमृत लाल साहू के अनुसार, रिंग रोड के पूरे नक्शे में कुल तीन रोड ओवर ब्रिज शामिल किए गए हैं। इनमें से भटौली स्थित ब्रिज का निर्माण पहले ही संपन्न हो चुका है, जबकि शेष दो ब्रिज पैकेज संख्या तीन और चार के अंतर्गत आते हैं। पैकेज तीन के इस ब्रिज का काम अब अंतिम चरण में है और जून के अंत तक शेष तकनीकी कार्यों को भी पूरा कर लिया जाएगा।
अन्य चरणों की समय सीमा तय
रिंग रोड के निर्माण को कुल पांच अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। वर्तमान में तीसरे चरण का काम एनएच-45 से कुशनेर के बीच तीव्र गति से चल रहा है। इस 36 किलोमीटर लंबे खंड के निर्माण पर लगभग 474 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। प्राधिकरण की योजना के अनुसार, पूरी रिंग रोड का अधिकांश हिस्सा साल 2026 के अंत तक उपयोग के लिए तैयार हो जाएगा। केवल पांचवें चरण के कार्य को पूर्ण करने की समय सीमा साल 2027 निर्धारित की गई है, क्योंकि इसका काम तुलनात्मक रूप से बाद में शुरू हुआ है। परियोजना का पहला चरण बरेला से मानेगांव के बीच स्थित है। इसकी कुल दूरी 16 किलोमीटर है और इसे 448 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस खंड का निर्माण लगभग 94 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है और अप्रैल के महीने तक इसे पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा। वहीं, दूसरा चरण मानेगांव से एनएच-45 तक फैला हुआ है, जिसकी लंबाई 20 किलोमीटर है। 535 करोड़ रुपये की लागत वाले इस पैकेज में अभी एक ब्रिज का निर्माण शेष है, जिसे छोड़कर लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसे जून 2026 तक पूरा करने की तैयारी है।
कुशनेर से अमझर तक चौथे चरण का विस्तार
रिंग रोड का चौथा चरण कुशनेर से अमझर के बीच तैयार हो रहा है। 24 किलोमीटर की लंबाई वाले इस खंड के निर्माण पर 342 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि तीसरे चरण के साथ ही इस चौथे चरण को भी जून तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि रिंग रोड का एक बड़ा हिस्सा यातायात के लिए उपलब्ध हो सके। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय सीमा की निगरानी के लिए लगातार क्षेत्रीय स्तर पर समीक्षा बैठकें की जा रही हैं, जिससे बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सके।
अंतिम चरण का लक्ष्य 2027
परियोजना का पांचवां और अंतिम चरण अमझर से बरेला तक विस्तृत है। इस साढ़े 18 किलोमीटर लंबे हिस्से को साल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जैसे-जैसे रिंग रोड के विभिन्न पैकेज आपस में जुड़ते जा रहे हैं, जबलपुर में भारी वाहनों के प्रवेश की समस्या का समाधान होता दिख रहा है। 114 किलोमीटर का यह पूरा घेरा तैयार होने के बाद शहर के भीतर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी और उपनगरीय क्षेत्रों के विकास को भी गति प्राप्त होगी। वर्तमान में एनएच-45 से कुशनेर के बीच चल रहे काम को इस पूरी कड़ी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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