
मॉस्को. रूस (Russia) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात (Petrol Exports) पर रोक लगाने की घोषणा की है। इस फैसले का मुख्य मकसद अपने देश के अंदर पेट्रोल की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना और कीमतों (Prices) को बढ़ने से रोकना है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव की वजह से दुनियाभर में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
उप प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम बाजार की स्थिति की समीक्षा की
रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक में देश के पेट्रोलियम बाजार की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में यह बात सामने आई कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भले ही कीमतों में अस्थिरता हो, लेकिन रूस के पास पर्याप्त भंडार और उत्पादन क्षमता मौजूद है। इसके बावजूद सरकार ने एहतियात के तौर पर निर्यात रोकने का फैसला किया ताकि घरेलू बाजार में किसी तरह की कमी या महंगाई न हो।
देश में ईंधन की कीमतें नहीं बढ़नी चाहिए- पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी साफ निर्देश दिए हैं कि देश में ईंधन की कीमतें तय अनुमान से ज्यादा नहीं बढ़नी चाहिए। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि तेल रिफाइनिंग का स्तर स्थिर है और कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे देश की जरूरत आसानी से पूरी हो सकती है। इस बैठक के बाद उप प्रधानमंत्री नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिया कि 1 अप्रैल से पेट्रोल के निर्यात पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि घरेलू बाजार को प्राथमिकता दी जा सके और कीमतों को नियंत्रण में रखा जा सके।
भारत के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक
वहीं भारत की बात करें तो सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और अगले दो महीनों के लिए सप्लाई पहले से सुनिश्चित कर ली गई है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और घरेलू एलपीजी उत्पादन में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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