
रियाद। इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के 23वें दिन सऊदी अरब ने पहली बार तेहरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। इस एक्शन के तहत सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के कई कर्मचारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है। सऊदी अरब की ओर से यह कदम तेहरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में जारी लगातार हमलों के बीच उठाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार सऊदी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि ईरान के सैन्य अटैची, उनके सहायक और दूतावास के तीन अन्य स्टाफ सदस्यों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित किया गया है। उन्हें 24 घंटे में रियाद छोड़ना होगा। मंत्रालय ने ईरान द्वारा सऊदी अरब में किए जा रहे हमलों को अंतरराष्ट्रीय संधियों, अच्छे पड़ोसीपन के सिद्धांत और राज्य संप्रभुता का सम्मान का “स्पष्ट उल्लंघन” करार दिया। सऊदी अरब के बयान में कहा गया कि ईरान के हमले बीजिंग समझौते, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 और इस्लामी भाईचारे के मूल्यों के खिलाफ हैं।
ईरानी दूतावास के कर्मचारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित करने के बाद सऊदी के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि ये ईरान की ओर से किए जा रहे हमले द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा प्रभाव डालेंगे। ऐसे में सऊदी अरब अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्र की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने में अब संकोच नहीं करेगा। सऊदी अरब का यह फैसला ईरान की ओर से खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों पर लगातार हमलों के जवाब में आया है। इससे पहले 18-19 मार्च को कतर ने भी ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अटैची तथा उनके स्टाफ को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित किया था, क्योंकि ईरान ने कतर के रास लफ्फान गैस सुविधा पर सबसे बड़ा हमला किया था, जिससे भयंकर नुकसान हुआ। कतर ने इसे अपनी संप्रभुता का “खतरनाक उल्लंघन” बताया था।
कतर के बाद ईरान के खिलाफ ऐसे कदम उठाने वाला सऊदी अरब दूसरा देश बन गया है, जिसने युद्ध शुरू होने के बाद यह फैसला किया है। जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित किया और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए तो क्षेत्रीय तनाव बढ़ने लगा। हाल ही में ईरान ने सऊदी अरब के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र कहे जाने वाले यानबू बंदरगाह पर भी बड़ा ड्रोन हमला किया था। इसके बाद सऊदी अरब ने यह कदम उठाया है। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को और जटिल बना रही है, जहां ईरान अमेरिका-इजरायल गठबंधन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने ईरान की आक्रामकता की निंदा की है और क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की है।
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