नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव (Rising tensions in West Asia) के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संकट (Global energy market crisis) के बादल मंडराने लगे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित बाधा की आशंका ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीच सऊदी अरब ने स्थिति से निपटने के लिए अपने पुराने वैकल्पिक मार्ग को पूरी क्षमता के साथ सक्रिय कर दिया है। देश की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन अब रोजाना करीब 70 लाख बैरल कच्चा तेल सप्लाई कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान से जुड़े जोखिम के कारण यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए अहम सहारा बनकर उभरी है। यह रणनीतिक पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल उत्पादन क्षेत्रों को लाल सागर स्थित यनबू बंदरगाह से जोड़ती है। इसके जरिए सऊदी अरब होर्मुज मार्ग को बायपास कर सीधे लाल सागर के रास्ते तेल निर्यात कर सकता है।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा जोखिम को देखते हुए कई तेल टैंकरों का रुख अब यनबू बंदरगाह की ओर मोड़ा गया है। इससे खाड़ी क्षेत्र के बजाय लाल सागर से तेल लोडिंग की प्रक्रिया तेज हुई है। शिपिंग डेटा में यनबू से कच्चे तेल के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी भी इस पाइपलाइन का सक्रिय रूप से उपयोग कर रही है।
दरअसल, यह पाइपलाइन इसी तरह की आपात स्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। सऊदी अरब लंबे समय से होर्मुज पर निर्भरता कम करना चाहता था। इसलिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहा जाता है, का निर्माण किया गया ताकि तेल सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सके।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाइपलाइन पूरी तरह से होर्मुज का विकल्प नहीं बन सकती। इसकी अधिकतम क्षमता 70 लाख बैरल प्रतिदिन है और यनबू बंदरगाह की निर्यात क्षमता भी सीमित बताई जा रही है। इसके अलावा लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां भी बनी हुई हैं। यमन के हूती विद्रोहियों की सक्रियता से जहाजों पर खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में यह पाइपलाइन फिलहाल राहत जरूर दे रही है, लेकिन लंबी अवधि के समाधान के रूप में इसकी क्षमता पर सवाल बने हुए हैं।
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