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शीतला अष्टमी 2026: कब है बासौड़ा? जानें शीतला माता की पूजा का महत्व, गधे की सवारी का रहस्य और क्यों लगाया जाता है बासी खाने का भोग

March 10, 2026

नई दिल्ली। होली के बाद आने वाला प्रमुख हिंदू(major Hindu festival following Holi,) पर्व शीतला अष्टमी(Sheetla Ashtami,) इस साल (celebrated this year)11 मार्च 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इसके एक दिन पहले 10 मार्च 2026, मंगलवार को शीतला सप्तमी(Sheetla Saptami) मनाई जाएगी। परंपरा के अनुसार सप्तमी के दिन घरों में विभिन्न पकवान बनाए(Traditionally, various dishes are prepared at home on Saptami,) जाते हैं और अष्टमी के दिन इन्हीं ठंडे या बासी भोजन का भोग(on Ashtami, these cold or stale foods are offered) शीतला माता को अर्पित(Sheetla Mata on Ashtami) किया जाता है। इसी कारण इस पर्व को बासौड़ा(this festival is also called Basoda) भी कहा जाता है।

हिंदू धर्म (In Hinduism)में शीतला माता(Sheetla Mata) को आरोग्य और स्वास्थ्य की देवी(health and well-being) माना जाता(considered the goddess) है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से चेचक, खसरा, त्वचा रोग, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा होती है। खासकर बच्चों की सेहत और परिवार की रोगमुक्ति के लिए यह व्रत और पूजा की जाती है। उत्तर भारत, राजस्थान, गुजरात, बंगाल और मध्य भारत में यह पर्व बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में शीतला माता को मां दुर्गा का ही एक रूप बताया गया है। उनका स्वरूप भी प्रतीकात्मक माना जाता है। शीतला माता गधे पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में झाड़ू, जल से भरा कलश, सूप और नीम की पत्तियां होती हैं। इन सभी वस्तुओं का संबंध स्वास्थ्य और स्वच्छता से जोड़ा गया है। झाड़ू और सूप साफ-सफाई का प्रतीक हैं, जबकि जल शीतलता का संकेत देता है। वहीं नीम की पत्तियों को आयुर्वेद में कई रोगों से बचाने वाली औषधि माना गया है।

शीतला अष्टमी पर ठंडे या बासी भोजन का भोग लगाने की भी खास मान्यता है। माना जाता है कि शीतला माता को ठंडी चीजें प्रिय हैं, इसलिए उन्हें एक दिन पहले बनाए गए भोजन का भोग लगाया जाता है। सप्तमी के दिन ही मीठे चावल, पूरी, हलवा, दही बड़े, कढ़ी-चावल और अन्य पकवान बनाकर रख लिए जाते हैं। अष्टमी के दिन इनका भोग माता को अर्पित कर परिवार के लोग भी वही भोजन ग्रहण करते हैं।

  • धार्मिक मान्यता के अनुसार बासौड़ा का यह पर्व मौसम के बदलाव का भी संकेत देता है। होली के बाद धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगती है, इसलिए यह परंपरा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि इसके बाद से बासी भोजन नहीं बल्कि ताजा और हल्का भोजन करना चाहिए। इस प्रकार शीतला अष्टमी न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह स्वच्छता, स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली का भी संदेश देता है।

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