
नई दिल्ली। पिछले कई महीनों से वैश्विक बाजार (Global market) में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अस्थिरता बनी हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव और सप्लाई बाधाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार (International oil market) प्रभावित हुआ है। इसी बीच रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर नया अनुमान जारी किया है, जिससे भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
2026 में औसतन 87 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है तेल
फिच के अनुसार, साल 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 87 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है। हालांकि मई से जुलाई के बीच कच्चे तेल के दाम 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बने रह सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजार में दबाव जारी रहेगा।
जुलाई के बाद गिरावट की संभावना
एजेंसी का अनुमान है कि यदि हालात सामान्य होते हैं तो अगस्त से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट शुरू हो सकती है। इस दौरान दाम घटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकते हैं, जबकि सितंबर के बाद यह स्तर लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इस गिरावट को सप्लाई में सुधार और उत्पादन बढ़ने से जोड़ा जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से बदल सकता है बाजार
फिच रिपोर्ट के मुताबिक, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही सामान्य हो जाती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। होर्मुज के खुलने के बाद बाजार में ओवरसप्लाई की स्थिति बनने की आशंका है, जिससे कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।
सप्लाई संकट ने बढ़ाई अस्थिरता
फिलहाल तेल बाजार में जो तेजी देखी जा रही है, उसका मुख्य कारण उत्पादन की कमी नहीं बल्कि सप्लाई बाधाएं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनरियों या उत्पादन क्षमता को स्थायी नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन सप्लाई चैन बाधित होने से कीमतें बढ़ी हैं।
ओपेक देशों के फैसलों का भी असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले का असर आने वाले महीनों में देखने को मिल सकता है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट का दबाव बनेगा।
होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक भूमिका
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से प्रतिदिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल का परिवहन होता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। वर्तमान में क्षेत्रीय तनाव के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा है, लेकिन यदि स्थिति सामान्य होती है तो 2026 के अंत तक तेल बाजार में बड़ी स्थिरता और कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है।
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