
नई दिल्ली। हिंदू धर्म (Hindu Religion) में देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) का विशेष महत्व माना जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाने वाला यह पर्व हरिशयनी, पद्मा और आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) चार माह के लिए क्षीर सागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और यहीं से चातुर्मास का आरंभ होता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
आज या कल, कब है देवशयनी एकादशी?
द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:12 बजे शुरू होकर 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। चूंकि व्रत और पर्व उदया तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, इसलिए देवशयनी एकादशी 25 जुलाई (शनिवार) को मनाई जाएगी।
व्रत पारण का समय:
26 जुलाई को सुबह 5:39 बजे से 8:22 बजे तक।
क्यों है इस व्रत का विशेष महत्व?
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और विवाह, संतान तथा जीवन की अन्य बाधाएं दूर होती हैं। शास्त्रों में इस व्रत को मोक्षदायी बताया गया है।
व्रत और पूजा की विधि
देवशयनी एकादशी का व्रत दशमी तिथि से ही प्रारंभ माना जाता है। दशमी के दिन सात्विक भोजन कर व्रत का संकल्प लें। एकादशी की सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें और यथासंभव रात्रि जागरण कर भगवान का स्मरण करें।
इस दिन करें इन मंत्रों का जाप
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके साथ यह श्लोक भी पढ़ना शुभ माना गया है—
“शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभम्।”
चातुर्मास में किन कार्यों से बचें?
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरंभ हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है। यह समय साधना, संयम, भक्ति और दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन क्या करें?
भगवान विष्णु को पीली मिठाई, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। सात्विक भोजन ग्रहण करें, जरूरतमंदों को दान दें और मन, वचन व कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
देवशयनी एकादशी की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस व्रत का महत्व पूछा था। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन करते हैं। जो भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से इस दिन व्रत एवं पूजा करता है, उसे हजारों यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है और अंततः विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
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